नई दिल्ली। जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान ने एक बार फिर बड़ा ऐलान किया है। पाकिस्तान की Federal Investigation Agency (FIA) ने अपनी नई Red Book में मसूद अजहर को मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल करते हुए उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी देने पर इनाम की रकम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी है। यह रकम पहले 50 लाख पाकिस्तानी रुपये थी।
पाकिस्तान का यह कदम ऐसे समय आया है, जब Financial Action Task Force (FATF) की अक्टूबर में अहम बैठक होने वाली है। इसी वजह से इस घोषणा के समय और मकसद को लेकर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों में इसे FATF के सामने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई दिखाने की पाकिस्तान की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत ने बताया दिखावटी कार्रवाई
पाकिस्तान की घोषणा पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसे “फर्जी और खोखली घोषणा” बताते हुए कहा कि ऐसी घोषणाओं का कोई खास परिणाम निकलने वाला नहीं है। भारत ने पाकिस्तान से केवल बयान और इनाम घोषित करने के बजाय आतंकवाद के खिलाफ वास्तविक और ठोस कार्रवाई करने को कहा है।
भारत का कहना है कि मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई का दावा तभी विश्वसनीय माना जाएगा, जब पाकिस्तान उसके खिलाफ प्रभावी कानूनी और सुरक्षा कदम उठाए। नई दिल्ली लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकी नेटवर्क के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाता रहा है।
FATF से पहले क्यों बढ़ाया इनाम?
मसूद अजहर को पाकिस्तान की Red Book में शामिल करना और इनाम बढ़ाना FATF की बैठक से कुछ सप्ताह पहले हुआ है। इसलिए इसे पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, केवल किसी व्यक्ति को मोस्ट वांटेड सूची में डालना या उसके सिर पर इनाम घोषित करना उसकी गिरफ्तारी या उसके नेटवर्क पर कार्रवाई के बराबर नहीं है।
मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी मामलों में वांछित है और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी भी है। अब भारत की नजर इस बात पर है कि पाकिस्तान का यह ऐलान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है या वास्तव में उसके खिलाफ कोई ठोस कदम भी उठाया जाता है।



