अमेरिका: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने की दिशा में अंतरिम शांति समझौते पर सहमति बनने के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। समझौते की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में मजबूत तेजी देखने को मिली।
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2.3 प्रतिशत फिसल गई। हाल के तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण तेल बाजार में बनी अनिश्चितता कम होने की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। हालांकि इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने की चेतावनी के बाद तेल की कीमतों में अस्थायी उछाल आया था।
तेल कीमतों में नरमी के साथ एशियाई शेयर बाजारों ने भी मजबूती दिखाई। जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। ताइवान के ताइएक्स इंडेक्स में भी उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। वहीं हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। अमेरिकी शेयर वायदा बाजारों में भी तेजी देखी गई। एसएंडपी 500 और नैस्डैक से जुड़े फ्यूचर्स में बढ़त ने संकेत दिया कि निवेशक वैश्विक आर्थिक जोखिमों को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजारों ने इस बात का स्वागत किया है कि अमेरिका और ईरान अपेक्षा से जल्दी किसी समझौते पर पहुंच गए। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़े दबाव में कमी आने की उम्मीद जगी है। तकनीकी क्षेत्र में अमेरिकी सेमीकंडक्टर शेयरों की मजबूती का असर भी एशियाई बाजारों पर सकारात्मक रूप से पड़ा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, जिन्होंने वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत में मध्यस्थता की, ने कहा कि दोनों देशों के बीच हुआ समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। उनके अनुसार, ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में कदम उठाएगा, जबकि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लागू नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा।
हालांकि बाजारों में उत्साह के बावजूद विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में फंसे जहाजों की लंबी कतार, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और बारूदी सुरंगों को हटाने जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। कई शिपिंग कंपनियों ने स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षित मार्गों की जानकारी मिलने तक जोखिम बरकरार रहने की बात कही है।
विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों का भरोसा लौट रहा है, लेकिन वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।



