Tuesday, March 10, 2026
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नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीति में आना परिवारवाद नहीं है क्या ?

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का राजनीति में आना बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। Nitish Kumar लंबे समय तक परिवारवाद की आलोचना करते रहे हैं, इसलिए Nishant Kumar के जदयू में आने पर सवाल उठ रहे हैं। निशांत का अब तक प्रत्यक्ष राजनीतिक योगदान सीमित रहा है, उन्होंने न चुनाव लड़ा, न संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई। ऐसे में उनके सक्रिय होने से परिवारवाद और राजनीतिक विरासत को लेकर नई चर्चा तेज हो गई है।

प्रतीक चौवे, संपादक

नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार ने जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ग्रहण कर ली है, जो जल्द ही बिहार की राजनीति में नए बदलाव के संकेत हैं। नीतीश कुमार के बाद बिहार का सीएम कौन बनेगा, इस पर जोरदार हल्ले के साथ चर्चा यह भी है कि निशांत कुमार को उप मुख्यमंत्री बनाया जा रहा है। राजनीति में कब कौन क्या बन जाए, कहना मुश्किल होता है। ज्यादा समय नहीं गुजरा है, भाजपा ने स्थापित चेहरों को साइड में कर नयों को सीएम ही नहीं केन्द्रीय मंत्री तक बना दिया। नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार के सीएम पद पर ‘विराजमान’ हैं, लालू प्रसाद यादव के साथ कई अन्य नेताओं को भी वे परिवारवाद का नाम लेकर गरियाने के लिए काफी प्रसिद्ध रहे। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा से उनका क्या समझौता हुआ था, यह किसी को नहीं मालूम। उन्हें राज्यसभा भेजा जाएगा या सीएम की कुर्सी से हटाया जाएगा, शायद इस तरह की कोई शर्त तय नहीं हुई होगी। उनके पुत्र निशांत कुमार के राजनीति में सक्रिय होने की संभावना भी इस समझौते में कहीं नहीं रही होगी। अब अचानक जो हो रहा है, वो खुद नीतीश कुमार तक के लिए भी चौंकाने वाला है।

अपने बेटे निशांत कुमार के राजनीति में सक्रिय होने की मौन स्वीकृति तो नीतीश कुमार की होगी ही, बावजूद इसके वो न तो रविवार को पार्टी के कार्यक्रम में शामिल हुए न ही निशांत कुमार से संबंधित कोई बयान जारी किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब से राज्यसभा जाने का एलान किया है तब से एक सवाल सबसे अधिक पूछा जा रहा है? वह बिहार के मुख्यमंत्री से जुड़ा। लोग कौन बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री? इस सवाल पर खूब चर्चा कर रहे हैं। हर गली, नुक्कड़, चौक-चौराहे, गांव से लेकर शहर तक यह सवाल चर्चा में है। लोग अपने अपने हिसाब से कुछ चेहरे को मुख्यमंत्री बता रहे हैं। कुछ जाति के चश्मे से तो कुछ सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों के आधार पर अपनी बात रख रहे हैं। इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय, भाजपा विधायक संजीव चौरसिया समेत कुछ अन्य दिग्गजों की तस्वीर साझा करते हुए लोग उन्हें मुख्यमंत्री बनने की अग्रिम बधाई दे रहे। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा पर गुस्साए कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय में जमकर तोड़फोड़ की, यह भी सच है कि नीतीश कुमार के कई मंत्री-विधायक तक इस फैसले से खुश नहीं हैं। इस बीच उनके बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाए जाने की बात भी लोगों के गले नहीं उतर रही। असल में यदि अब तक के उनके रिकॉर्ड को देखा जाए तो निशांत कुमार का प्रत्यक्ष राजनीतिक योगदान लगभग नगण्य माना जाता है। उन्होंने न तो कोई चुनाव लड़ा है, न किसी राजनीतिक पद पर रहे हैं और न ही पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई है। जदयू की बैठकों, चुनावी रणनीतियों या जनसभाओं में भी उनकी मौजूदगी बहुत कम देखने को मिली है। ऐसे में अचानक यह सब होन सबको हैरानी में तो डालता ही है, साथ ही नीतीश कुमार के परिवारवाद की मुखालफत पर भी सवाल खड़े करता है।

दरअसल, बिहार में भाजपा पिछले कुछ वर्षों में लगातार अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने में लगी रही है। लोकसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन और बढ़ते राजनीतिक प्रभाव ने पार्टी के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि भाजपा राज्य की सत्ता में अपनी भूमिका को और मजबूत करना चाहे। हालांकि इसे केवल “राजनीतिक खेल” कहना भी पूरी तरह उचित नहीं होगा। लोकतांत्रिक राजनीति में हर दल अपनी ताकत बढ़ाने और भविष्य की रणनीति बनाने की कोशिश करता है। भाजपा भी इससे अलग नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि इस पूरी रणनीति का असर बिहार की राजनीति और जनता पर क्या पड़ेगा। फिलहाल यह केवल शुरुआत है। असली चुनौती तब होगी जब निशांत कुमार को संगठन और जनता के बीच अपनी पहचान बनानी पड़ेगी। बिहार की राजनीति में स्वीकार्यता हासिल करने के लिए उन्हें सक्रिय भूमिका निभानी होगी और जनता से सीधा संवाद स्थापित करना होगा। जदयू की सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही निशांत कुमार ने राजनीति में पहला कदम जरूर रख दिया है, लेकिन आगे का रास्ता उनके लिए आसान नहीं होगा। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि वह केवल एक राजनीतिक विरासत के रूप में सामने आते हैं या अपने काम से अलग पहचान बना पाते हैं।

Prateek Chauvey
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माननीय प्रतीक चौबे जी(Prateek Chauvey ) द्वारा प्रस्तुत यह मंच जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा भरने का प्रयास है। यहाँ दी गई जानकारी आपकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा में सहायक होगी, आपको नई सोच के साथ बदलाव और सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करेगी।
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