नई दिल्ली। देश में UPI Payment को लेकर चल रही चार्ज की चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने नई व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार ₹2,000 तक के UPI लेनदेन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकते। RuPay Debit Card से किए जाने वाले भुगतान को भी इस शुल्क से बाहर रखा गया है।
इस फैसले के बाद आम UPI यूजर्स के लिए रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतान पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि ग्राहकों से UPI इस्तेमाल करने के लिए सामान्य Transaction Fee नहीं ली जाएगी। इसके अलावा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले यानी P2P UPI Payment भी मुफ्त बने रहेंगे।
₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर क्या होगा?
यहीं पर सबसे ज्यादा भ्रम है। नई अधिसूचना ने ₹2,000 तक के UPI भुगतान को शुल्क-मुक्त श्रेणी में स्पष्ट रूप से शामिल किया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ₹2,000 से ज्यादा का भुगतान करने वाले ग्राहक से अपने आप कोई शुल्क वसूल लिया जाएगा।
ताजा जानकारी के अनुसार बड़े Merchant Payments यानी P2M Transactions को लेकर MDR की व्यवस्था अलग है। NPCI ने 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू करने की घोषणा की है। यह ग्राहक से सीधे लिया जाने वाला UPI शुल्क नहीं है। वहीं P2P लेनदेन मुफ्त रहेंगे।
क्या ₹5 देना होगा?
₹2,000 से ऊपर के हर UPI भुगतान पर ग्राहक से ₹5 चार्ज लगेगा, ऐसी बात फिलहाल सही नहीं है। भुगतान करने वाले आम ग्राहक के लिए कोई सामान्य ₹5 Transaction Fee घोषित नहीं की गई है।
सरकार का कहना है कि UPI को लंबे समय तक सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ डिजिटल पेमेंट सिस्टम बनाए रखने के लिए Merchant Discount Rate जैसी व्यवस्था की जरूरत हो सकती है। इसका असर मुख्य रूप से भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों और पेमेंट इकोसिस्टम पर पड़ेगा, न कि सामान्य P2P यूजर्स पर।
इसलिए अगर आप ₹500, ₹2,000 या किसी व्यक्ति को ₹10,000 भी UPI से भेजते हैं, तो केवल राशि अधिक होने की वजह से ग्राहक से कोई तय ₹5 शुल्क अपने आप नहीं कटेगा।



