जयपुर: जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में सरकारी दवाइयों की कथित चोरी और अवैध बिक्री का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता के चलते एक संविदा फार्मासिस्ट और एक बाहरी युवक को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। दोनों के पास से महंगी दवाइयों, इंजेक्शनों, सीरिंज और अन्य मेडिकल सामग्री का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है, जिसकी कीमत करीब 10 हजार रुपए बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, आरोपी फार्मासिस्ट बबन अस्पताल के दवा वितरण केंद्र से जुड़ा हुआ है और वर्तमान में चरक भवन स्थित वेयरहाउस में तैनात था। आरोप है कि उसने एक बाहरी युवक मनोज कुमार यादव के साथ मिलकर अस्पताल की दवाइयों को बाहर बेचने की योजना बनाई थी। कथित तौर पर मनोज ने डिजिटल भुगतान के जरिए फार्मासिस्ट को 1500 रुपए भेजे, जिसके बाद अस्पताल के स्टोर और दवा वितरण केंद्र से दवाइयां निकालकर उसे सौंप दी गईं।
बताया जा रहा है कि दवाइयों को एक बड़े डिब्बे में रखकर युवक के बैग में पहुंचाया गया था। इसी दौरान अस्पताल परिसर में तैनात सुरक्षा एजेंसी ‘रेस्को’ के गार्डों को दवा चोरी की सूचना मिली। सूचना मिलते ही सुरक्षा कर्मियों ने दोनों संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया। जब फार्मासिस्ट और युवक अस्पताल के बांगड़ परिसर स्थित मुख्य गेट की ओर बढ़े, तब सुरक्षा गार्डों ने उन्हें रोककर तलाशी ली। जांच के दौरान युवक के बैग से एंटीबायोटिक श्रेणी के इंजेक्शन, एनएस की बोतलें, सीरिंज और अन्य मेडिकल सामग्री बरामद हुई। शुरुआती पूछताछ में युवक ने दावा किया कि वह अस्पताल में भर्ती एक परिचित मरीज के लिए दवाइयां ले जा रहा है।
हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने संबंधित वार्ड के रेजिडेंट डॉक्टरों से इसकी पुष्टि की। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि किसी मरीज के लिए इस तरह की दवाइयों की मांग नहीं की गई थी। इसके बाद युवक का दावा झूठा साबित हो गया। चरक भवन वेयरहाउस के इंचार्ज श्याम गुप्ता ने बताया कि आरोपी फार्मासिस्ट पिछले करीब दो वर्षों से अस्पताल में विभिन्न स्थानों पर ड्यूटी कर रहा था। उसके व्यवहार और गतिविधियों को लेकर पहले भी संदेह जताया गया था। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही उसे सावधानी बरतने और नियमों का पालन करने की हिदायत दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद वह कथित रूप से दवाइयों की हेराफेरी में शामिल पाया गया।
अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इस मामले के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या दवाइयों की कालाबाजारी से जुड़ा गिरोह तो सक्रिय नहीं है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।



