नई दिल्ली। वर्ष 1985 में हुए Air India Flight 182 यानी कनिष्क विमान बम विस्फोट मामले की जांच को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, कनाडा की Royal Canadian Mounted Police (RCMP) जांच के लिए गठित टास्क फोर्स का आकार कम करने और मामले को निष्क्रिय स्थिति में रखने पर विचार कर रही है। इस संभावित कदम से हादसे में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों में गहरी निराशा और नाराजगी है।
जांच सीमित किए जाने की खबर से परिवार चिंतित
12 सितंबर को कनिष्क विमान हादसे के पीड़ित परिवारों के साथ जांच की प्रगति को लेकर एक बैठक हुई थी। बैठक में शामिल परिवारों को कथित तौर पर जांच दल को छोटा करने और मामले को ‘Inactive’ स्थिति में रखने की संभावित योजना के बारे में जानकारी मिली।
कनिष्क फाउंडेशन के चेयरमैन और हादसे में अपने परिवार को खोने वाले संजय लाजर ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई। लाजर के अनुसार, उन्होंने इस हमले में अपने माता-पिता और छोटी बहन को खो दिया था। उन्होंने कनाडाई सरकार से जांच जारी रखने, नए सुराग तलाशने और दोषियों तक पहुंचने के प्रयासों को मजबूत करने की अपील की है।
23 जून 1985 को हुआ था हमला
Air India Flight 182 कनाडा के मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए भारत जा रही थी। 23 जून 1985 को आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में बम विस्फोट हुआ। इस घटना में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में अधिकांश कनाडाई नागरिक थे।
कनिष्क बम विस्फोट को कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला माना जाता है। जांच में खालिस्तानी चरमपंथ से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई थी। मामले में कानूनी कार्रवाई हुई, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि साजिश से जुड़े कई सवालों और संभावित जिम्मेदार लोगों को लेकर अब भी पूरी स्पष्टता नहीं है।
परिवारों ने जांच जारी रखने की मांग की
संजय लाजर ने अपने पत्र में कनाडा के प्रधानमंत्री के साथ-साथ भारत और कनाडा के संबंधित अधिकारियों से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आतंकवाद और चरमपंथ से जुड़े खतरों का हवाला देते हुए जांच को बंद करने के बजाय इसमें नई गति लाने की अपील की।
हालांकि, RCMP की ओर से जांच को औपचारिक रूप से समाप्त करने का अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। फिलहाल टास्क फोर्स में संभावित बदलाव की खबर ने चार दशक से अधिक समय से न्याय और जवाब की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों की चिंताओं को फिर सामने ला दिया है। परिवारों का कहना है कि इतने बड़े आतंकवादी हमले की जांच को तब तक जारी रखा जाना चाहिए, जब तक इससे जुड़े अनसुलझे सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिल जाता।



