रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षाओं से हुई नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने फिलहाल सरकार के आदेश को आगे लागू करने से रोकते हुए नियुक्त अधिकारियों को राहत दी है। यह मामला उन अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्तियां हासिल की थीं।
हाईकोर्ट का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब झारखंड सरकार ने कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की जांच के आधार पर बड़ी संख्या में भर्ती परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने का फैसला लिया है। सरकार की ओर से 2014 के बाद हुई विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा के बाद कई परीक्षाओं पर कार्रवाई की गई। इनमें झारखंड लोक सेवा आयोग और अन्य भर्ती संस्थाओं से जुड़ी परीक्षाएं शामिल हैं।
सरकार के फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई थी, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति प्राप्त कर ली थी और अपने पदों पर काम भी कर रहे थे। नियुक्तियां रद्द होने की आशंका के बीच प्रभावित अभ्यर्थियों ने न्यायालय का रुख किया। याचिकाओं में दलील दी गई कि यदि भर्ती प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, लेकिन बिना व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट किए चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां खत्म करना उचित नहीं होगा।
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से छात्रों का आंदोलन भी चल रहा था। अभ्यर्थी कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे। सरकार ने आंदोलन के बीच कई परीक्षाओं को रद्द करने के साथ जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के कदम उठाने का फैसला किया था।
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए आपराधिक जांच विभाग की जांच कराने का निर्णय भी लिया है। इसके अलावा झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में आंतरिक सतर्कता तंत्र बनाने तथा भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति को दो महीने में अपनी रिपोर्ट देने का लक्ष्य दिया गया है।
हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से फिलहाल 11वीं से 13वीं जेपीएससी के जरिए नियुक्त अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, अंतिम फैसला आगे की न्यायिक सुनवाई और मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।



