Wednesday, January 21, 2026
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Jaipur wildlife tourism: पिंकसिटी की नई पहचान…वाइल्डलाइफ टूरिज्म, 2025 में करीब 7 लाख टूरिस्ट ने की जंगल सफारी

जयपुर अब ऐतिहासिक धरोहरों के साथ-साथ वाइल्डलाइफ टूरिज्म की नई पहचान बन रहा है। वर्ष 2025 में करीब 7 लाख देसी-विदेशी पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया। वन विभाग के अनुसार 6.98 लाख पर्यटकों से 8.90 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। सबसे अधिक 3.39 लाख सैलानियों ने नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क का भ्रमण किया।

जयपुर। जंगल और उसमें रहने वाले वन्यजीव हमेशा लोगों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहे हैं और रहेंगे, इसलिए वन्यजीवों की रक्षा करना भी बेहद जरूरी है। इसकी बानगी है कि वन्यजीवों को देखने के लिए हर साल लाखों लोग जयपुर आ रहे हैं। यहां की जंगल सफारी में पिछले साल करीब 7 लाख देसी-विदेशी पावणे वन्यजीवों को देखने के लिए पहुंचे।

राजधानी जयपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहर, किले और संस्कृति के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है, लेकिन अब जयपुर की नई पहचान वाइल्ड लाइफ टूरिज्म के क्षेत्र में भी बन चुकी है। वर्ष 2025 में यहां आने वाले पर्यटकों ने रिकॉर्ड बनाया है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जयपुर में वाइल्ड लाइफ को करीब से देखने और जानने के लिए 6 लाख 98 हजार 668 पर्यटक घूमने के लिए पहुंचे। इससे विभाग को 8.90 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। डीसीफ विजयपाल सिंह ने बताया कि सर्वाधिक 3 लाख 39 हजार 433 पर्यटकों ने नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क का विजिट किया। पर्यटकों के बढ़ते रुझान को देखते हुए यहां एवियरी पार्क बनाने की योजना है, जिससे विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों को भी लोग देख सकेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में इन स्थानों की लोकप्रियता में और भी ज्यादा इजाफा होने वाला है।

इसलिए भी जयपुर बन रहा खास

जयपुर देश का एकमात्र शहर है, जहां आमागढ, झालाना और बीड़ पापड़ में तीन लेपर्ड सफारी मौजूद है। जयपुर आने वाले सैलानियों को रणथम्भौर और सरिस्का टाइगर रिजर्व का अनुभव करवाने के लिए नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में वर्ष 2018 में लॉयन सफारी और वर्ष 2024 में टाइगर सफारी शुरू की गई। इन दोनों सफारियों की लोकप्रियता का आलम ये है कि यहां पिछले साल 34 हजार सैलानियों ने इसका लुत्फ उठाया। वहीं, पहली सिटी लेपर्ड सफारी के रूप में विशेष पहचान बनाने वाली झालाना में 46 हजार से अधिक टूरिस्ट पहुंचे। यहां रेंज अधिकारी जितेन्द्र सिंह शेखावत की टीम द्वारा प्रभावी मॉनिटरिंग व वन्यजीव संरक्षण के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते रहे हैं।

उत्तर भारत का पहला हाथी गांव

जयपुर में आमेर किले के पास ही कुंडा में उत्तर भारत का पहला ऐसा गांव बसा हुआ है, जहां केवल हाथी और उनकी देखरेख करने वाले परिवारों के सदस्य रहते हैं। हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष शफीक बल्लु खान ने बताया कि विरासत और धार्मिक परंपराओं में हाथी का विशेष महत्व रहा है, इसलिए यहां करीब 100 एकड़ में यह गांव बसाया गया है। यहां लगभग 75 हाथी हैं। भारत में हाथी अधिकांशतः दक्षिण में ही देखने को मिलते हैं। यही कारण है कि यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले साल 55 हजार 337 रही।

बीड़ पापड़ लेपर्ड सफारी की शानदार शुरुआत

सरकार ने जून 2025 में बीड पापड़ लेपर्ड सफारी शुरू की। नई विकसित बीड़ पापड़ लेपर्ड सफारी में पहले ही वर्ष में करीब 7 महीने में 1 हजार 153 पर्यटकों ने नई सफारी में भ्रमण किया। इससे विभाग को 9 लाख 54 हजार 132 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। रेंज अधिकारी रघुवेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि यहां वन्यजीवों की प्रभावी मॉनिटरिंग की जा रही है। यहां लेपर्ड, चीतल, नीलगाय, सियार, लोमड़ी, मोर और 100 से अधिक स्तनधारी प्रजातियों का भी बसेरा है।

एसीएफ प्राची चौधरी ने बताया कि जयपुर में वन्यजीवों को देखने के लिए आने वाले परिदर्शकों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। यहां 6 एनिमल सफारी होने से पर्यटक भी वन्यजीवों को देखने के लिए काफी उत्साहित रहते हैं। पिछले साल 6.98 लाख से ज्यादा लोग वन्यजीवों को देखने के लिए पहुंचे। वन एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए ​योजनाएं बनाई जा रही हैं।

रिपोर्टर- मनीष कुमार शर्मा

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Premanshu Chaturvedi
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