तेहरान। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को लेकर बड़ा दावा किया है। ईरान के गार्जियन काउंसिल और विशेषज्ञों की सभा के सदस्य अहमद खातमी ने कहा है कि अमेरिकी और इजराइली हमलों के बावजूद देश की परमाणु क्षमता को खत्म नहीं किया जा सका है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की परमाणु ताकत केवल उसके परमाणु केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के वैज्ञानिकों और उनके वर्षों के ज्ञान से भी जुड़ी हुई है।
खातमी ने ईरान के सरकारी टेलीविजन पर दिए बयान में अमेरिका और इजराइल पर निशाना साधते हुए कहा कि दोनों देशों ने ईरान के परमाणु केंद्रों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन इससे देश की परमाणु क्षमता समाप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि ईरान के वैज्ञानिकों के पास मौजूद ज्ञान को किसी हमले के जरिए नष्ट नहीं किया जा सकता।
उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई को विफल बताते हुए कहा कि ईरान को पीछे धकेलने की कोशिश सफल नहीं हुई है। खातमी ने यह भी दावा किया कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी संभावित चुनौती का जवाब देने की क्षमता रखता है।
परमाणु केंद्रों पर हुए हमले
अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे को निशाना बनाकर कई हमले किए हैं। इन हमलों का घोषित उद्देश्य ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना रहा है। हालांकि, ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसके परमाणु कार्यक्रम की बुनियादी क्षमता और वैज्ञानिक विशेषज्ञता को समाप्त नहीं किया जा सकता।
ईरान के इस ताजा बयान से संकेत मिलता है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव के बावजूद पीछे हटने के मूड में नहीं है। वहीं, अमेरिका और इजराइल लंबे समय से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की बात कहते रहे हैं।
तनाव के बीच बढ़ी बयानबाजी
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच तनाव के बीच दोनों पक्षों की ओर से लगातार कड़े बयान सामने आ रहे हैं। ईरान अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं को बरकरार रखने का दावा कर रहा है, जबकि अमेरिका और इजराइल ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर गंभीर चिंता जताते रहे हैं।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी यह टकराव पश्चिम एशिया की पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और जटिल बना रहा है। आने वाले दिनों में ईरान की परमाणु गतिविधियों, अंतरराष्ट्रीय निगरानी और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई कूटनीतिक पहल पर दुनिया की नजर रहेगी।



