Monday, November 2, 2026
HomeIndiaराष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित IPS प्रशाखा माथुर 40 विला केस में...

राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित IPS प्रशाखा माथुर 40 विला केस में चर्चा में, जानिए क्या हैं आरोप

राजस्थान की वरिष्ठ IPS अधिकारी प्रशाखा माथुर और उनके पति IAS शिखर अग्रवाल 40 विला-कॉटेज खरीद मामले को लेकर चर्चा में हैं। जानिए अनंता रिसॉर्ट्स से जुड़ा पूरा मामला, लगाए गए आरोप, ACB की संभावित जांच और प्रशाखा माथुर का पुलिस सेवा में रहा करियर।

जयपुर: राजस्थान कैडर की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर का नाम अब 40 विला-कॉटेज खरीद मामले को लेकर चर्चा में है। पुलिस सेवा में कई अहम जिम्मेदारियां निभाने और राष्ट्रपति पुलिस पदक सहित सम्मान हासिल करने वाली प्रशाखा माथुर को सरकार ने उनके पति आईएएस शिखर अग्रवाल के साथ एपीओ कर दिया है। इस मामले में दोनों पर अनंता रिसॉर्ट्स से कथित तौर पर कम कीमत पर 40 लग्जरी विला और कॉटेज खरीदने तथा कंपनी को नियमों में छूट देकर अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। हालांकि, ये आरोप हैं और मामले की जांच जारी है।

जानें क्या है 40 विला केस, कैसे फंसी आईपीएस, पति भी हुए APO

क्या है 40 विला-कॉटेज खरीद मामला?

मामले के अनुसार, आईएएस शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी आईपीएस प्रशाखा माथुर और उनके परिवार पर आरोप है कि उन्होंने करीब ढाई साल के दौरान एक ही कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदे। आरोप यह भी है कि इस खरीद से जुड़ी प्रक्रिया में कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

मामले के सामने आने के बाद सरकार ने पहले आईएएस शिखर अग्रवाल को एपीओ किया। इसके बाद आईपीएस प्रशाखा माथुर को भी एपीओ सूची में शामिल कर लिया गया। अब इस प्रकरण में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच की संभावना और कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज है।

ACB की जांच के दायरे में आईएएस-आईपीएस दंपती

40 विला-कॉटेज खरीद मामले में एसीबी की भूमिका अहम हो गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सरकार ने आईएएस शिखर अग्रवाल के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दे दी है। एसीबी मामले में आय से अधिक संपत्ति और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर सकती है।

जांच के दौरान आईपीएस प्रशाखा माथुर से भी पूछताछ किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, आगे की कार्रवाई और जांच का दायरा संबंधित एजेंसी के आधिकारिक कदमों पर निर्भर करेगा।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में रहा जलवा

अलवर से शुरू हुआ पुलिस सेवा का सफर

प्रशाखा माथुर ने अपने पुलिस करियर की शुरुआत अलवर सिटी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने जयपुर के महिला थाना उत्तर में भी सेवाएं दीं। वर्ष 2000 में उन्हें सिरोही का पुलिस अधीक्षक बनाया गया।

अपने करियर के दौरान उन्होंने जोधपुर सीआईडी (एसएसबी), अजमेर जीआरपी, जोधपुर ग्रामीण, बांसवाड़ा और पाली सहित कई स्थानों पर पुलिस अधीक्षक के रूप में जिम्मेदारियां निभाईं। जुलाई 2003 में उन्हें राजस्थान राज्य महिला आयोग का सदस्य सचिव भी नियुक्त किया गया।

इंटेलिजेंस ब्यूरो में भी संभाली अहम जिम्मेदारी

प्रशाखा माथुर का अनुभव राजस्थान पुलिस तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2009 में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नई दिल्ली गईं और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में अतिरिक्त उप निदेशक तथा बाद में उप निदेशक के पद पर कार्य किया।

वर्ष 2014 में राजस्थान लौटने के बाद उन्हें जयपुर पुलिस मुख्यालय में आईजी की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद फरवरी 2020 में वे राजस्थान राज्य फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की निदेशक बनीं। जुलाई 2020 में उन्हें राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) नियुक्त किया गया।

वर्ष 2023 में उन्होंने पुलिस मुख्यालय की पुनर्गठन एवं नियम शाखा की जिम्मेदारी संभाली। सितंबर 2024 में वे एडीजी (योजना, आधुनिकीकरण, कल्याण एवं पुनर्गठन) बनीं। अक्टूबर 2025 में उन्हें एडीजी योजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण के पद पर तैनात किया गया था।

पुलिस पदकों से हो चुकी हैं सम्मानित

पुलिस सेवा के लिए मिल चुके हैं राष्ट्रीय सम्मान

प्रशाखा माथुर को पुलिस सेवा में योगदान के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2011 में उन्हें पुलिस पदक से सम्मानित किया गया था। इसके बाद वर्ष 2022 में सराहनीय सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से नवाजा गया।

एक ओर उनका पुलिस सेवा का लंबा और सम्मानित करियर रहा है, वहीं अब 40 विला-कॉटेज खरीद मामले में लगे आरोपों ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है। मामले में जांच और संबंधित एजेंसियों की कार्रवाई से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Image