जयपुर। पूर्णिमा यूनिवर्सिटी की MBA छात्रा यशस्वी रोहिला की मौत के मामले में उसके परिजनों की ओर से दर्ज कराई गई FIR में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। छात्रा के भाई शुभम रोहिला ने शिवदासपुरा थाने में शिकायत देकर अहमदाबाद की एक कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी योगेश मोटियानी पर कथित तौर पर झूठे वादे करने, निजी वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने और मानसिक प्रताड़ना देने के आरोप लगाए हैं।
परिजनों का कहना है कि कथित ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना से परेशान होकर यशस्वी ने 31 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी की छठी मंजिल से छलांग लगा दी थी। उसे महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। FIR में कॉलेज प्रशासन की लापरवाही पर भी सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।

इंटर्नशिप के दौरान कंपनी के अधिकारी से संपर्क
23 वर्षीय यशस्वी रोहिला पूर्णिमा यूनिवर्सिटी में MBA बैच 2025-27 की छात्रा थी। शिकायत के मुताबिक, MBA के पहले वर्ष के बाद उसके लिए तीन महीने की इंटर्नशिप अनिवार्य थी। इसके लिए यूनिवर्सिटी में विभिन्न कंपनियों को बुलाया गया था।
इसी प्रक्रिया के दौरान यशस्वी का अहमदाबाद की Blue Waves Logistic Pvt. Ltd. में इंटरव्यू हुआ और उसका चयन हो गया। FIR में आरोप लगाया गया है कि इंटर्नशिप के दौरान कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी योगेश मोटियानी ने कथित तौर पर झूठे वादे और प्रलोभन देकर यशस्वी से नजदीकी बढ़ाई।
परिजनों की शिकायत के अनुसार, अधिकारी ने यशस्वी के साथ संबंध बनाए और उसका वीडियो भी बना लिया। आरोप है कि बाद में इसी वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल किया गया और बार-बार संबंध बनाने का दबाव डाला गया।
29 अक्टूबर को परिवार को बताई थी परेशानी
FIR में 29 अक्टूबर की तारीख को महत्वपूर्ण बताया गया है। शिकायत के अनुसार, उस दिन शाम को यशस्वी ने अपने परिवार को पूरी घटना के बारे में जानकारी दी थी। परिजनों ने उसे समझाया और संबंधित व्यक्ति का फोन नहीं उठाने की सलाह दी थी।
परिवार का आरोप है कि 31 अक्टूबर को परीक्षा देने यूनिवर्सिटी पहुंचने के बाद यशस्वी को योगेश मोटियानी का फोन आया। शिकायत में कहा गया है कि फोन पर उसे फिर से कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और ब्लैकमेल करने की धमकी दी गई।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल
परिजनों ने अपनी शिकायत में यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि कथित ब्लैकमेलिंग और प्रशासन की ओर से उचित कदम नहीं उठाए जाने के कारण यशस्वी मानसिक दबाव में थी। घटना के बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार को घटना की सूचना यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से दी गई थी।
पुलिस ने दर्ज की FIR, डिजिटल साक्ष्यों की जांच
यशस्वी के भाई शुभम रोहिला की रिपोर्ट पर शिवदासपुरा थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 308(2) और 108 के तहत प्रकरण दर्ज होने की जानकारी दी गई है। जांच सब इंस्पेक्टर मुकेश कुमार को सौंपी गई है।
पुलिस अब शिकायत में नामजद अधिकारी की भूमिका, कथित वीडियो, फोन कॉल और ब्लैकमेलिंग से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल करेगी। साथ ही यूनिवर्सिटी प्रशासन पर लगाए गए आरोपों की भी जांच की जाएगी।
जांच में सामने आएगा घटनाक्रम
परिजनों की शिकायत के मुताबिक, यशस्वी ने 29 अक्टूबर को अपनी परेशानी परिवार को बताई थी, जबकि 31 अक्टूबर को उसकी मौत हुई। ऐसे में जांच के दौरान यह पता लगाना अहम होगा कि इस बीच क्या घटनाक्रम हुआ और क्या किसी स्तर पर मदद या हस्तक्षेप की गुंजाइश थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। FIR में लगाए गए आरोपों और यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।



