नई दिल्ली: भारत अब सिर्फ तेल और गैस के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि बिजली के अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भी अपनी भूमिका बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। इसी दिशा में भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच समुद्र के नीचे एक हाई-वोल्टेज पावर केबल बिछाने की योजना पर काम चल रहा है। यह परियोजना भारत के महत्वाकांक्षी ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ (OSOWOG) विजन का हिस्सा मानी जा रही है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुसार, भारत इस तरह के ग्लोबल पावर कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर कई देशों के साथ बातचीत कर रहा है। भारत और UAE के बीच प्रस्तावित अंडरसी पावर लिंक करीब 1,600 किलोमीटर लंबा हो सकता है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बिजली का आदान-प्रदान आसान बनाना है।
“40,000 करोड़ रुपये की मेगा पावर कनेक्टिविटी योजना”
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली इस हाई-वोल्टेज पावर केबल परियोजना पर करीब 40,000 करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है। यह मेगा प्रोजेक्ट सिर्फ दो देशों के बीच बिजली कनेक्टिविटी बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में वैश्विक ऊर्जा नेटवर्क तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक’ के दौरान इस प्रस्तावित परियोजना की जानकारी दी। करीब 1,600 किलोमीटर लंबी अंडरसी पावर केबल के जरिए भारत और UAE के बीच बिजली का आदान-प्रदान संभव हो सकेगा। इस परियोजना में इतना बड़ा निवेश भारत की बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सौर और पवन ऊर्जा जैसी स्वच्छ ऊर्जा को सीमाओं के पार पहुंचाना और भविष्य की पावर कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना है।
भारत से खाड़ी देशों तक पहुंचेगी ग्रीन एनर्जी
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा भारत की बढ़ती रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता को मिल सकता है। भारत सौर और पवन ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भविष्य में देश अपनी जरूरतें पूरी करने के बाद बची हुई ग्रीन एनर्जी को खाड़ी देशों तक पहुंचाने की दिशा में काम कर सकता है। समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली हाई-वोल्टेज केबल के जरिए अलग-अलग टाइम जोन का फायदा उठाया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर, जब भारत में बिजली की मांग कम होगी, तब अतिरिक्त बिजली दूसरे देशों को भेजी जा सकती है और जरूरत के समय दूसरे देशों से बिजली ली जा सकती है।
सऊदी अरब, श्रीलंका और सिंगापुर तक विस्तार की योजना
भारत सिर्फ UAE तक सीमित नहीं रहना चाहता। सरकार की योजना भविष्य में पावर ग्रिड कनेक्टिविटी को सऊदी अरब, श्रीलंका, सिंगापुर और यूरोप तक बढ़ाने की है। सऊदी अरब के साथ भी भारत क्षेत्रीय ऊर्जा कनेक्टिविटी को लेकर सहयोग बढ़ा रहा है। इसका मकसद एशिया, मध्य-पूर्व और यूरोप के बीच एक मजबूत ऊर्जा नेटवर्क तैयार करना है।
‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ का लक्ष्य
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित One Sun, One World, One Grid (OSOWOG) पहल का लक्ष्य दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को एक साझा बिजली ग्रिड से जोड़ना है। इसके जरिए जहां सूरज चमक रहा होगा, वहां पैदा होने वाली सौर ऊर्जा को जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सकेगा। इस विजन से न सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संबंध भी मजबूत हो सकते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?
भारत की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल होगा।
अंतरराष्ट्रीय बिजली व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक संबंध और गहरे हो सकते हैं।
भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका बढ़ सकती है।



