Thursday, August 20, 2026
HomeIndiaभारत की जीत के 5 मिनट बाद बरसा पानी, लेकिन असली हीरो...

भारत की जीत के 5 मिनट बाद बरसा पानी, लेकिन असली हीरो निकले गॉल के 130 ग्राउंड्समैन! ऋषभ पंत ने किया सलाम

भारत-श्रीलंका गॉल टेस्ट में बारिश ने कई बार खेल रोका, लेकिन करीब 130 ग्राउंड्समैन ने हर बार कुछ ही मिनटों में मैदान को कवर किया। 650 किलो से ज्यादा वजन वाले कवर्स और तेज समुद्री हवाओं के बीच उनकी मेहनत ने ऋषभ पंत को भी प्रभावित किया।

गॉल। भारत और श्रीलंका के बीच गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए टेस्ट मैच में बारिश ने कई बार खेल का मजा किरकिरा किया। मुकाबले के दौरान कभी अचानक बादल छाए तो कभी तेज बारिश ने मैदान को घेर लिया। हर बार करीब 130 ग्राउंड्समैन की टीम कुछ ही मिनटों में मैदान को कवर्स से ढकने और मौसम साफ होने पर उसे दोबारा खेलने लायक बनाने में जुट गई। भारतीय टीम की जीत के करीब पांच मिनट बाद पांचवें दिन फिर बारिश हुई। हालांकि इस बार मैच खत्म हो चुका था, इसलिए मैदान बचाने की वह हड़बड़ी नहीं थी। पूरे मुकाबले के दौरान ग्राउंड स्टाफ की मेहनत ने भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को भी प्रभावित किया।

ऋषभ पंत ने ग्राउंड स्टाफ को कहा शुक्रिया

टेस्ट मैच के बाद ऋषभ पंत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर ग्राउंड स्टाफ की मेहनत की तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों में तेज बारिश के बीच कर्मचारी मैदान को कवर करते हुए दिखाई दिए। पंत ने ग्राउंड्समैन और सपोर्ट स्टाफ का शुक्रिया अदा करते हुए उनकी मेहनत और सहयोग की सराहना की। उन्होंने खास तौर पर बारिश के दौरान उनके काम को अविश्वसनीय बताया। क्रिकेट मैच में खिलाड़ियों और टीमों पर तो सबकी नजर रहती है, लेकिन बारिश के बीच मैदान को खेलने लायक बनाए रखने में ग्राउंड स्टाफ की भूमिका बेहद अहम होती है।

गॉल में करीब 130 लोगों की टीम संभालती है मैदान

गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान करीब 130 लोगों की टीम मैदान की जिम्मेदारी संभालती है। इनमें करीब 16 कर्मचारी स्थायी हैं, जबकि बड़े आयोजनों के दौरान कुछ कर्मचारियों को हम्बनटोटा से भी बुलाया जाता है। बाकी कर्मचारियों को मैच और प्रैक्टिस सेशन के लिए दिहाड़ी के आधार पर रखा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, दैनिक कर्मचारियों को करीब 2,500 से 4,000 श्रीलंकाई रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है। बारिश आते ही पूरी टीम अलग-अलग समूहों में बंटकर अपनी जिम्मेदारी संभालती है। किसी टीम का काम पिच को कवर करना होता है, जबकि दूसरे कर्मचारी स्क्वायर, गेंदबाजों के रन-अप और आउटफील्ड को सुरक्षित करते हैं।

सिर्फ 5 मिनट में पूरा मैदान कवर

गॉल के ग्राउंड स्टाफ की सबसे बड़ी ताकत उनकी तेजी और आपसी तालमेल है। बारिश का संकेत मिलते ही कर्मचारी अलग-अलग दिशाओं से कवर्स लेकर मैदान की ओर दौड़ पड़ते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी टीम पांच मिनट से भी कम समय में मैदान को कवर कर सकती है। सबसे पहले पिच और स्क्वायर को सुरक्षित किया जाता है। इसके बाद गेंदबाजों के रन-अप और आउटफील्ड को कवर किया जाता है। बारिश गॉल में कई बार तेज होती है, लेकिन उसकी अवधि कम हो सकती है। ऐसे में कुछ मिनट की देरी भी मैदान को काफी नुकसान पहुंचा सकती है।

650 किलो से ज्यादा भारी हो सकता है एक कवर

मैदान को कवर करना सिर्फ तेजी का काम नहीं बल्कि भारी शारीरिक मेहनत भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 100×100 आकार का एक कवर 650 किलोग्राम से ज्यादा वजन का हो सकता है। पूरे मैदान को सुरक्षित रखने के लिए करीब 28 कवर्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसका मतलब है कि बारिश शुरू होने पर कुछ ही मिनटों में ग्राउंड स्टाफ को हजारों किलोग्राम वजन के कवर्स को सही जगह पहुंचाकर बिछाना पड़ता है।

समुद्र की हवा भी बनती है चुनौती

गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम समुद्र के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में तेज क्रॉसविंड ग्राउंड स्टाफ के लिए एक अलग चुनौती बन जाती है। कवर्स को हवा में उड़ने से रोकने के लिए 300 से ज्यादा रबर टायर तैयार रखे जाते हैं। जरूरत पड़ने पर इन टायरों को कवर्स के ऊपर रखा जाता है ताकि तेज हवा के बावजूद मैदान सुरक्षित रहे।

समुद्र की ओर देखकर मौसम का अंदाजा

गॉल स्टेडियम की लोकेशन ग्राउंड स्टाफ के लिए चुनौती होने के साथ-साथ मौसम का संकेत समझने में भी मदद करती है। कर्मचारी गॉल फोर्ट के पास हिंद महासागर की तरफ नजर रखते हैं। समुद्र के ऊपर बादल बनते दिखाई देने पर टीम अलर्ट हो जाती है। बारिश का आधिकारिक संकेत मिलते ही पिच को सबसे पहले कवर किया जाता है। इसके बाद स्क्वायर, रन-अप और आउटफील्ड को सुरक्षित किया जाता है। ग्राउंड स्टाफ के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चीज रिएक्शन टाइम है।

मैदान को खोलना भी उतना ही मुश्किल

बारिश शुरू होते ही कवर्स बिछाना जितना जरूरी है, मौसम साफ होने के बाद उन्हें तेजी से हटाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अगर मैदान पर पानी ज्यादा देर तक जमा रहता है तो खेल दोबारा शुरू करने में लंबा समय लग सकता है। गॉल के ग्राउंड्समैन हर बारिश के बाद मैदान को जल्द से जल्द तैयार करने में जुट जाते हैं। भारत-श्रीलंका टेस्ट के दौरान भी उनकी यही मेहनत देखने को मिली।

खिलाड़ियों के पीछे छिपी मेहनत को पंत ने पहचाना

टेस्ट मैच के दौरान दर्शकों की नजर आमतौर पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन, विकेट और स्कोर पर रहती है। लेकिन गॉल टेस्ट ने यह भी दिखाया कि क्रिकेट मैच को सफलतापूर्वक आयोजित करने के पीछे ग्राउंड स्टाफ की कितनी बड़ी भूमिका होती है। बारिश से बार-बार बाधित हुए मुकाबले में गॉल के ग्राउंड्समैन ने बेहद कम समय में मैदान को सुरक्षित किया। उनकी इसी मेहनत को ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया के जरिए सराहा।

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Image