Thursday, September 3, 2026
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भारत की GDP पर घमासान: 7.8% ग्रोथ पर उठे सवाल, वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बोले- ‘अल्पज्ञान’ से फैल रही गलत जानकारी…

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रहने के बाद आंकड़ों को लेकर बहस तेज हो गई है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने नई GDP सीरीज और गणना के तरीके पर सवाल उठाए हैं। वहीं वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने इन दावों का विरोध करते हुए कहा कि नई सीरीज को समझे बिना पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करना सही नहीं है।

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% दर्ज की गई है। सरकार के लिए यह आंकड़ा अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है, लेकिन पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों और उनकी गणना की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। इसी बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने GDP की नई सीरीज को लेकर उठ रहे सवालों का विरोध किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि नई सीरीज में हुए बदलावों को समझे बिना पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करना उचित नहीं है।

नई GDP सीरीज को लेकर क्यों उठा विवाद?

GDP विवाद की प्रमुख वजह सरकार की ओर से जारी की गई नई GDP सीरीज है। फरवरी 2026 में जारी इस सीरीज में GDP का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया। इसके साथ आंकड़े जुटाने और उनकी गणना के तरीकों में भी बदलाव किया गया। सुभाष चंद्र गर्ग का तर्क है कि नई सीरीज में पिछली तिमाहियों के आंकड़ों में बड़े बदलाव किए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से जून 2025 की तिमाही के मौजूदा कीमतों वाले GDP आंकड़े में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी का मुद्दा उठाया है। गर्ग के मुताबिक, अगर पुराने आंकड़ों के आधार पर तुलना की जाए तो जून 2026 की GDP ग्रोथ का आंकड़ा काफी अलग हो सकता है। उनका दावा है कि यह ग्रोथ करीब 2.6% के आसपास रह सकती थी।

नीलकंठ मिश्रा ने दावों को बताया ‘अल्पज्ञान’

विवाद के बीच नीलकंठ मिश्रा ने GDP के आंकड़ों का बचाव किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर GDP सीरीज पर सवाल उठाने वालों की आलोचना करते हुए ‘अल्पज्ञानी’ और बेहद गलत दावों का जिक्र किया। मिश्रा का कहना है कि नई GDP सीरीज में अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को मापने और आंकड़े जुटाने के तरीकों में सुधार किया गया है। इसलिए पुरानी और नई सीरीज के आंकड़ों की सीधे तुलना करने से पहले उनके बीच हुए बदलावों को समझना जरूरी है।

कार और दोपहिया वाहनों की बिक्री का दिया उदाहरण

नीलकंठ मिश्रा ने अर्थव्यवस्था की स्थिति समझने के लिए GDP के अलावा दूसरे संकेतकों का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक, अगस्त में कार और SUV की बिक्री में करीब 35%, जबकि दोपहिया वाहनों की बिक्री में 20% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। उन्होंने निर्यात में करीब 9% और कमर्शियल वाहनों की बिक्री में लगभग 40% की तेजी का भी उल्लेख किया। मिश्रा के अनुसार, ये आंकड़े कारोबार और निर्माण गतिविधियों में मजबूती का संकेत देते हैं।

बैंक लेंडिंग और निवेश में भी सुधार का दावा

मिश्रा ने बैंक लेंडिंग, टैक्स कलेक्शन और निर्माण क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को भी अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक बताया। उनका कहना है कि बैंकिंग सेक्टर में कर्ज देने की रफ्तार में सुधार दिखाई दे रहा है। उन्होंने निर्माण गतिविधियों को मजबूत बताते हुए कहा कि निजी क्षेत्र के निवेश को लेकर लगातार चिंता जताने वालों के सामने अब निवेश गतिविधियों के स्पष्ट संकेत मौजूद हैं।

आम लोगों की आय अभी चुनौती

हालांकि, नीलकंठ मिश्रा ने यह भी माना कि अर्थव्यवस्था में अभी कुछ कमियां मौजूद हैं। उन्होंने वास्तविक वेतन में धीमी वृद्धि को इसका एक संकेत बताया। उनके अनुसार, अर्थव्यवस्था को पूरी क्षमता से काम करने और लेबर मार्केट को मजबूत बनाने में कुछ तिमाहियां लग सकती हैं। इसके लिए लगातार कई तिमाहियों तक औसत से अधिक आर्थिक विकास दर बनाए रखना जरूरी होगा।

7.5% तक रह सकती है ग्रोथ?

भविष्य की आर्थिक वृद्धि को लेकर मिश्रा ने सकारात्मक अनुमान जताया है। उनका कहना है कि बजट का दबाव कम होने और अनुकूल मौद्रिक परिस्थितियों का असर आर्थिक गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है। उनके मुताबिक, आने वाले समय में भारत की औसत GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रह सकती है और सामान्य यानी तटस्थ बजट एवं मौद्रिक नीतियों की स्थिति में भी अर्थव्यवस्था करीब 7.5% की वृद्धि हासिल कर सकती है। हालांकि, उन्होंने आने वाले समय में महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना को भी एक चुनौती बताया है।

कांग्रेस ने भी सरकार पर साधा निशाना

GDP के आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि नई GDP सीरीज और आंकड़ों में बदलाव के कारण अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। कांग्रेस का तर्क है कि केवल GDP ग्रोथ बढ़ने से आम लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं मानी जा सकती। रोजगार, वास्तविक आय, खपत और लोगों की बचत जैसे संकेतकों को भी अर्थव्यवस्था का आकलन करते समय देखना जरूरी है।

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