Thursday, June 25, 2026
HomeIndiaUS-ईरान रिश्तों में पिघली बर्फ, पाकिस्तान बना शांति का सूत्रधार, चीन ने...

US-ईरान रिश्तों में पिघली बर्फ, पाकिस्तान बना शांति का सूत्रधार, चीन ने भी सराहा, 60 दिन में हो सकती है ऐतिहासिक डील

बीजिंग। लंबे समय से तनावपूर्ण रहे अमेरिका और ईरान के संबंधों में अब सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच हालिया उच्चस्तरीय वार्ता के बाद 60 दिनों के भीतर एक व्यापक समझौते तक पहुंचने का रोडमैप तैयार किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसे अब चीन का भी समर्थन मिल रहा है।

स्विट्जरलैंड में हुई महत्वपूर्ण बैठक में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों ने कई विवादित मुद्दों पर आगे बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई। दोनों पक्षों ने एक ऐसे ढांचे को मंजूरी दी है, जिसके तहत अगले 60 दिनों में तकनीकी और राजनीतिक स्तर पर वार्ताओं का दौर जारी रहेगा। उद्देश्य परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर स्थायी समाधान तलाशना है।

इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक हाई-लेवल कमेटी गठित करने पर भी सहमति बनी है। यह समिति वार्ता की प्रगति पर नजर रखेगी और विभिन्न कार्य समूहों से नियमित रिपोर्ट प्राप्त करेगी। इसके अलावा तकनीकी विशेषज्ञों की अलग-अलग टीमें जटिल मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगी। सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक लेबनान से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर समन्वय तंत्र स्थापित करना है।

इसके तहत एक विशेष ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि क्षेत्रीय तनाव को नियंत्रित किया जा सके और सैन्य गतिविधियों को कम करने की दिशा में काम हो सके। पाकिस्तान की मध्यस्थता को इस कूटनीतिक प्रगति का अहम कारण माना जा रहा है। पाकिस्तान के नेतृत्व ने दोनों पक्षों के बीच संवाद बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई है। चीन ने भी सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए ऐसे प्रयासों को समर्थन मिलना चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि अगले दो महीनों में बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो यह पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। हालांकि अंतिम समझौते तक पहुंचने का रास्ता अभी भी आसान नहीं माना जा रहा, क्योंकि परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और सुरक्षा गारंटी जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

फिलहाल दुनिया की निगाहें इस 60-दिवसीय कूटनीतिक प्रक्रिया पर टिकी हैं, जो अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है।

Please enable JavaScript in your browser to complete this form.

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

× Popup Image