नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में गुरुवार को कमोडिटी बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर वायदा कारोबार में चांदी की कीमत करीब 8,300 रुपये गिर गई, जबकि सोना लगभग 2,500 रुपये सस्ता हो गया। इस गिरावट के बाद सोने का भाव 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव करीब 2,00,500 रुपये पर पहुंच गया। कीमती धातुओं में आई इस गिरावट का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिखाई दिया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, महंगाई की चिंता और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता को बाजार में बिकवाली की संभावित वजहों में गिना जा रहा है।
MCX पर सोना-चांदी कितना सस्ता हुआ?
MCX के दिसंबर वायदा भाव से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सोने और चांदी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
- सोना: करीब 2,500 रुपये गिरकर 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम।
- चांदी: करीब 8,300 रुपये गिरकर 2,00,500 रुपये प्रति किलोग्राम।
ये वायदा बाजार के बताए गए भाव हैं। स्थानीय सर्राफा बाजार में सोने-चांदी के खुदरा भाव अलग हो सकते हैं। खरीदारी से पहले अपने शहर के ताजा रेट और लागू टैक्स की जानकारी जरूर लें।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, सोने की कीमत 1.82 फीसदी गिरकर 4,074.37 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। वहीं, चांदी की कीमत में 4 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव 55.408 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। ग्लोबल बाजार में आई इस कमजोरी का असर घरेलू वायदा बाजार पर भी पड़ सकता है। हालांकि, भारतीय बाजार में कीमतों पर रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात लागत तथा स्थानीय मांग का भी प्रभाव पड़ता है।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के भाव? जानें 3 बड़ी वजहें
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा सकती हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में तेल की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने का उल्लेख है। तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में सोने जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों पर दबाव बढ़ सकता है।
2. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर नजर
निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर संबंधी फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं। यदि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं या उनमें बढ़ोतरी की आशंका मजबूत होती है, तो डॉलर आधारित निवेश और ब्याज देने वाले विकल्प आकर्षक हो सकते हैं। इसका असर सोने की मांग और कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, फेड का वास्तविक फैसला आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति पर निर्भर करता है।
3. अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से निवेशकों को ब्याज देने वाले विकल्पों में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। सोना नियमित ब्याज नहीं देता, इसलिए बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर इसकी आकर्षकता कम हो सकती है। रिपोर्ट में दो साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड एक सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंचने का उल्लेख है। इस तरह की परिस्थितियां सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव डाल सकती हैं।
क्या आगे और सस्ता होगा सोना-चांदी?
सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक तनाव और निवेशकों की मांग पर बाजार की दिशा निर्भर करेगी। हालांकि, केवल एक दिन की गिरावट के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि कीमतें आगे और गिरेंगी या फिर तेजी से वापसी करेंगी। खरीदारी या निवेश से पहले ताजा बाजार भाव, जोखिम और अपनी जरूरतों का आकलन करना जरूरी है।



