मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा देओल अपनी मां हेमा मालिनी और दिग्गज अभिनेत्री जया बच्चन के समर्थन में उतर आई हैं। दोनों अभिनेत्रियों की सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और पैपराजी के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए ईशा ने कहा कि ये कलाकार हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के स्तंभ हैं और इनका सम्मान किया जाना चाहिए। मीडिया के साथ बातचीत में ईशा ने पैपराजी कल्चर पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तस्वीरें खींचने वाले लोगों को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है, बल्कि उन एजेंसियों और लोगों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए, जो ज्यादा लाइक्स और सोशल मीडिया ट्रैफिक के लिए इस तरह के कंटेंट को बढ़ावा देते हैं।
‘इंडस्ट्री के स्तंभ हैं, उनका सम्मान करना चाहिए’
ईशा देओल ने कहा कि जया बच्चन और हेमा मालिनी जैसी वरिष्ठ अभिनेत्रियों ने हिंदी सिनेमा को बहुत कुछ दिया है। ऐसे कलाकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा, “ये सभी लोग हमारी इंडस्ट्री के स्तंभ हैं। आपको उनका सम्मान करना चाहिए। उन्होंने ही आपको सिनेमा दिया है। इसलिए उन्हें वह सम्मान दीजिए, जिसके वे हकदार हैं।” ईशा के मुताबिक, हर कलाकार का स्वभाव अलग होता है। कुछ लोग पैपराजी के साथ हंसी-मजाक करना पसंद करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सभी कलाकारों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाए। दूसरों की निजी सीमाओं और सहजता का सम्मान करना जरूरी है।
पैपराजी को निर्देश देने वाली एजेंसियों पर भी उठाए सवाल
ईशा ने पैपराजी के व्यवहार की तुलना बच्चों की परवरिश से करते हुए कहा कि अगर कोई बच्चा गलत व्यवहार करता है, तो उसकी परवरिश और उसे दिशा देने वालों की भूमिका पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह पैपराजी कल्चर में भी कुछ बड़े लोग और एजेंसियां तस्वीरें खींचने वालों को निर्देश देती हैं। ज्यादा व्यूज, लाइक्स और सोशल मीडिया ट्रैफिक हासिल करने की होड़ में विवादित या असहज करने वाले कंटेंट को बढ़ावा दिया जा सकता है। ईशा ने जोर दिया कि समस्या को केवल कैमरे के सामने मौजूद व्यक्ति तक सीमित रखने के बजाय इसके पीछे काम करने वाली व्यवस्था को भी समझना चाहिए।
जया बच्चन पहले भी पैपराजी पर जता चुकी हैं नाराजगी
जया बच्चन सार्वजनिक जगहों पर पैपराजी के व्यवहार और अपनी निजता को लेकर कई बार नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। वह अक्सर कैमरों के सामने अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों के कारण चर्चा में रहती हैं। एक इंटरव्यू में मीडिया के साथ अपने संबंधों पर बात करते हुए जया ने कहा था कि उनका मीडिया के साथ रिश्ता अच्छा है, लेकिन पैपराजी के साथ उनका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने पैपराजी की भूमिका और उन्हें मीडिया कहे जाने पर भी सवाल उठाए थे। जया का मानना रहा है कि किसी कलाकार की तस्वीर लेने के दौरान उसकी निजता और व्यक्तिगत सीमाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
हेमा मालिनी की मुस्कुराहट को लेकर हुई थी ट्रोलिंग
जनवरी 2026 में मथुरा में सांसद खेल प्रतियोगिता के दौरान हेमा मालिनी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में वह विद्यार्थियों को मेडल देती दिखाई दी थीं। उनके चेहरे पर मुस्कान नहीं होने को लेकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें ट्रोल किया था। इसके बाद मुंबई में बीएमसी चुनाव के दौरान वोट डालने पहुंचीं हेमा मालिनी ने पैपराजी के सामने मुस्कुराते हुए अपनी स्याही लगी उंगली दिखाई थी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था, “मैं मुस्कुरा रही हूं, ठीक है? अब शिकायत मत करना कि मैं मुस्कुराती नहीं हूं।” उनकी इस प्रतिक्रिया को सोशल मीडिया पर पहले हुई ट्रोलिंग के जवाब के तौर पर देखा गया था।
सेलिब्रिटी कल्चर में सम्मान और निजता पर फिर छिड़ी बहस
ईशा देओल के बयान ने एक बार फिर सेलिब्रिटी कल्चर, पैपराजी की जिम्मेदारी और सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। जहां कलाकारों की सार्वजनिक मौजूदगी लोगों की दिलचस्पी का विषय होती है, वहीं उनकी निजी सीमाओं का सम्मान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ईशा का संदेश साफ है कि लोकप्रियता या सार्वजनिक जीवन में होने का मतलब यह नहीं कि किसी कलाकार के साथ असम्मानजनक व्यवहार किया जाए। सिनेमा को दशकों तक योगदान देने वाले वरिष्ठ कलाकारों के प्रति सम्मान बनाए रखना जरूरी है।



