काठमांडू। नेपाल में भारी बारिश के बाद आई बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। कई इलाकों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच नेपाल सरकार ने भारत समेत कई देशों की ओर से भेजे जाने वाले विदेशी खोज एवं बचाव दलों की मदद लेने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि स्थानीय सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव अभियान को संभालने में सक्षम हैं।
बाढ़ और भूस्खलन से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में सड़कों, पुलों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। कई जगहों पर मलबा जमा होने के कारण लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं। कई विदेशी नागरिकों के भी संपर्क से बाहर होने की खबर है। इनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसी वजह से भारत सहित कई देशों ने राहत और खोज अभियान में विशेषज्ञ टीमें भेजने की पेशकश की थी।
हालांकि नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं देने का फैसला किया। अधिकारियों का तर्क है कि स्थानीय सुरक्षा बल और आपदा प्रबंधन एजेंसियां अभियान को प्रभावी तरीके से चला रही हैं। सरकार का यह भी मानना है कि बाहरी टीमों के आने से राहत अभियान के दौरान तालमेल बनाए रखने में अतिरिक्त चुनौती पैदा हो सकती है।
नेपाल पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चला रहे हैं। मलबे में दबे लोगों और लापता नागरिकों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया भी गया है। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण बचाव कार्य में लगातार मुश्किलें सामने आ रही हैं।
विदेशी बचाव दलों को अनुमति नहीं देने के बावजूद नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय और आर्थिक सहायता के दरवाजे बंद नहीं किए हैं। विभिन्न देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और आर्थिक मदद की पेशकश की गई है।
फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को तलाशना, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और क्षतिग्रस्त इलाकों में जरूरी सेवाएं बहाल करना है। सरकार का कहना है कि जरूरत बढ़ने पर भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के स्वरूप पर दोबारा विचार किया जा सकता है।



