Monday, November 2, 2026
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दिल्ली में पुलिस बनाम पुलिस! अपने ही मुख्यालय के बाहर जवानों का प्रदर्शन, दो अधिकारियों के तबादले का विरोध

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर सोमवार को उस समय असामान्य स्थिति बन गई, जब विभाग के ही करीब 80 पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों के तबादले के विरोध में प्रदर्शन करने पहुंच गए।

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर सोमवार को उस समय असामान्य स्थिति बन गई, जब विभाग के ही करीब 80 पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों के तबादले के विरोध में प्रदर्शन करने पहुंच गए। शाहदरा थाने में वकील और पुलिस के बीच हुए विवाद के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ और तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले से नाराज पुलिसकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर एकत्र होकर अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने दोनों अधिकारियों की पुरानी पोस्टिंग बहाल करने और पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की मांग की।

पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे करीब 80 पुलिसकर्मी
2 नवंबर की सुबह दिल्ली पुलिस के करीब 80 कर्मचारी पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे। प्रदर्शनकारियों ने दोनों अधिकारियों के तबादलों पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए। मौके पर नई दिल्ली जिले के DCP सचिन शर्मा पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मियों को मुख्यालय के अंदर जाकर वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी बात रखने के लिए समझाया। हालांकि, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। पुलिसकर्मियों की मांग है कि दोनों अधिकारियों की पुरानी पोस्टिंग बहाल की जाए और पुलिस कमिश्नर उनसे सीधे बातचीत करें।

क्या है पूरा वकील-पुलिस विवाद?
इस पूरे मामले की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस थाने में हुई एक घटना से हुई थी। उस दिन वकील ललित बंसल के साथ कथित मारपीट के दौरान उनके सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई थी। घटना के बाद वकील पक्ष ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके बाद दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। वकीलों ने आरोप लगाया कि मामले में पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

28 अक्टूबर को ACP और SHO का तबादला
वकीलों की हड़ताल और विवाद के बीच दिल्ली पुलिस प्रशासन ने 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार का तबादला कर दिया। ACP मनस्वी वशिष्ठ को स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रन (SPUWAC) में भेजा गया, जबकि इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सिक्योरिटी यूनिट में स्थानांतरित किया गया। इन तबादलों के बाद वकीलों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारियों में इन फैसलों को लेकर असंतोष सामने आया।

पुलिसकर्मियों की क्या हैं मांगें?
प्रदर्शन कर रहे पुलिसकर्मी दोनों अधिकारियों की पुरानी पोस्टिंग बहाल करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे पुलिस कमिश्नर से सीधे बातचीत करना चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए और पुलिसकर्मियों को भी अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। इस बीच, पुलिस प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को मुख्यालय के अंदर जाकर बातचीत करने के लिए समझाने की कोशिश की गई।

पुलिस महकमे के भीतर उठे सवाल
पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने विभाग के भीतर असंतोष को उजागर किया है। एक ओर वकील पक्ष ने अपने सहयोगी के साथ कथित मारपीट के मामले में कार्रवाई की मांग की थी, वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों के तबादलों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। फिलहाल, पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन और दोनों अधिकारियों के तबादलों को लेकर पुलिस प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

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