नई दिल्ली। दिल्ली में कैंसर मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर कथित तौर पर नकली और अवैध तरीके से हासिल की गई महंगी दवाओं की सप्लाई करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के मुताबिक, आरोपी मरीजों को करीब एक-एक लाख रुपये में एवालुमैब इंजेक्शन बेच रहे थे। जांच के दौरान एक सैंपल को दवा बनाने वाली कंपनी के माध्यम से जर्मनी की मर्क लैब में जांच के लिए भेजा गया। रिपोर्ट में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाला मूल एक्टिव इंग्रीडिएंट शून्य पाया गया। पुलिस के मुताबिक, यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला था और इसकी कथित गतिविधियों का दायरा करीब 9 करोड़ रुपये का था।
588 एंटी-कैंसर वायल समेत भारी बरामदगी
क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई के दौरान 588 भरे हुए एंटी-कैंसर वायल, 6 खाली वायल और 7 खाली दवा के बॉक्स बरामद किए। इसके अलावा दूसरी दवाओं की 3,021 यूनिट और करीब 50 लाख रुपये नकद भी पुलिस के हाथ लगे। बरामद दवाओं में डार्जालेक्स, इमफिंजी, एरबिटक्स, ऑपडाइटा, गाजीवा, बावेन्सियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी कैंसर की दवाएं शामिल होने की बात पुलिस ने कही है।
राजस्थान की सरकारी योजना की दवाओं की भी कथित हेराफेरी
पुलिस के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि राजस्थान सरकार की योजना के तहत कैंसर मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली दवाएं भी कथित तौर पर कालाबाजारी के नेटवर्क में पहुंचीं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी सप्लाई की दवाएं सिस्टम से बाहर कैसे निकलीं और इन्हें मरीजों या निजी खरीदारों तक किस माध्यम से पहुंचाया गया।
तीन रास्तों से सिंडिकेट तक पहुंचती थीं दवाएं
पुलिस की जांच के मुताबिक, कथित सिंडिकेट तक दवाएं मुख्य रूप से तीन तरीकों से पहुंचती थीं:
- गैरकानूनी स्रोतों से खरीदी गई कथित नकली दवाएं।
- अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए रखी दवाओं की कथित हेराफेरी।
- सरकारी संस्थानों और गोदामों से सरकारी सप्लाई की दवाओं को कथित तौर पर बाहर निकालना।
पुलिस के अनुसार, इन दवाओं को बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड, ड्रग लाइसेंस और जरूरी दस्तावेजों के घरों और अन्य ठिकानों पर रखा जाता था। इसके बाद बिचौलियों के माध्यम से इनकी सप्लाई की जाती थी।
असली पैकिंग से रीपैकिंग तक, ऐसे चलता था खेल
जांच में कथित तौर पर सामने आया कि गिरोह असली कार्टन और खाली दवा के बॉक्स संभालकर रखता था। पुलिस के मुताबिक, बैच नंबर, MRP और दवा की पहचान से जुड़ी जानकारी एसीटोन जैसे केमिकल की मदद से मिटाई जाती थी। इसके बाद थर्मोकोल बॉक्स, बबल रोल, टेप और पॉलीथीन का इस्तेमाल कर दवाओं की नई पैकिंग तैयार की जाती थी। पुलिस को कथित लेनदेन से जुड़े रजिस्टर और डायरियां भी मिली हैं।
7 राज्यों तक फैला था नेटवर्क
क्राइम ब्रांच के मुताबिक, इस कथित रैकेट का नेटवर्क दिल्ली-NCR के अलावा मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और अन्य इलाकों तक फैला था। नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, झज्जर और फरीदाबाद के लोगों के नाम भी जांच में सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, नोएडा के आनंद कुमार के पास से 337 एंटी-कैंसर वायल, फरीदाबाद के दीपक उर्फ रवि के पास से 108 वायल और 6.5 लाख रुपये, जबकि गुरुग्राम के मयंक गर्ग के पास से 55 वायल बरामद किए गए।
17 आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
मामले में अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। गिरफ्तार आरोपियों में लक्ष्मी नगर के अभिषेक वैश्य, शुभम कुमार चौधरी और सूरज चौधरी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, अभिषेक वैश्य वर्ष 2022 से दवाओं की खरीद और सप्लाई से जुड़ा था। उसके पास से 4 लाख रुपये, जबकि शुभम कुमार चौधरी के पास से 23 लाख रुपये बरामद किए गए। 22 जून को मिली गुप्त सूचना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। इसके बाद पूर्वी दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई। 11 जुलाई को ड्रग्स विभाग और स्थानीय पुलिस के साथ दिल्ली और नवी मुंबई में कई टीमों ने कार्रवाई की। आगे की पूछताछ और तलाशी के आधार पर गिरफ्तारियां की गईं। इस मामले में 12 जुलाई को क्राइम ब्रांच थाने में FIR दर्ज की गई। पुलिस अब कथित सप्लाई चेन, पैसों के लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।



