Thursday, August 6, 2026
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Being Human ज्वेलरी केस में सलमान खान को कोर्ट का समन, बहन अलवीरा समेत कई लोगों को पेश होने के आदेश!

चंडीगढ़ (प्रज्ञा पांडे)। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान, उनकी बहन अलवीरा खान अग्निहोत्री और Being Human ज्वेलरी से जुड़े अन्य लोगों को चंडीगढ़ की एक अदालत ने कथित धोखाधड़ी के मामले में समन जारी किया है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 5 अक्टूबर को पेश होकर शिकायत पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह मामला चंडीगढ़ के कारोबारी अरुण गुप्ता की शिकायत पर दर्ज हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया है कि Being Human ब्रांड के नाम पर ज्वेलरी शोरूम खोलने के लिए उन्हें गलत जानकारी और बड़े वादे कर निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। शिकायत के अनुसार, अरुण गुप्ता ने वर्ष 2018 में मणिमाजरा (चंडीगढ़) में Being Human ज्वेलरी शोरूम शुरू करने के लिए Style and Content Jewellery Private Limited के साथ समझौता किया था।

गुप्ता का दावा है कि उन्होंने इस कारोबार में करीब 3 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसमें लगभग 1 करोड़ रुपये शोरूम तैयार करने पर खर्च हुए। उनका कहना है कि उन्होंने कंपनी की सभी शर्तों का पालन किया, लेकिन वादा किए गए सहयोग और व्यावसायिक समर्थन नहीं मिला। शिकायत में कहा गया है कि फरवरी 2020 से Being Human ज्वेलरी की सप्लाई करने वाला स्टोर बंद हो गया, जिससे उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई और कारोबार को भारी नुकसान हुआ। कारोबारी ने आरोप लगाया है कि कंपनी से जुड़े लोगों ने बिजनेस मॉडल और संभावनाओं को लेकर भ्रामक जानकारी दी, जिसके आधार पर उन्होंने निवेश किया।

इस मामले में कंपनी पहले ही सभी आरोपों को खारिज कर चुकी है। कंपनी का कहना है कि सलमान खान की भूमिका केवल Being Human ब्रांड का लाइसेंस देने तक सीमित थी। कंपनी के मुताबिक, वर्ष 2015 में सलमान खान फाउंडेशन ने Being Human ब्रांड का लाइसेंस Style and Content Jewellery Private Limited को दिया था। इसके बाद ज्वेलरी के संचालन, बिक्री और मार्केटिंग की पूरी जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की थी। फिलहाल अदालत ने सलमान खान, अलवीरा खान अग्निहोत्री और अन्य संबंधित लोगों को समन जारी कर 5 अक्टूबर को पेश होने और अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि कोर्ट द्वारा समन जारी किया जाना आरोपों के सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होता। मामले में आगे की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की सत्यता पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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