Ram Mandir Donation Scam: कांग्रेस ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उन्हें 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए. पार्टी का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री ने 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में की थी, इसलिए इस मामले पर उनका जवाब देना जरूरी है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि जिस ट्रस्ट के गठन का श्रेय प्रधानमंत्री ने लिया था, उससे जुड़े कथित घोटाले और चंदे के दुरुपयोग के आरोपों पर उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है.
‘संसद में जवाब दें प्रधानमंत्री’
जयराम रमेश ने कहा कि वैसे तो प्रधानमंत्री लोकसभा में कम ही आते हैं, लेकिन 5 फरवरी 2020 को उन्होंने स्वयं सदन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अब जब ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं और चंदे के गबन के आरोप सामने आए हैं, तब प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल मानसून सत्र में इस मुद्दे को मजबूती से उठाएंगे और प्रधानमंत्री से सदन में जवाब देने की मांग करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जा सकती है अंतरिम रिपोर्ट
इस बीच, राम मंदिर में दान के कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सोमवार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट सीधे अदालत में सौंप सकती है.
यह घटनाक्रम कथित चढ़ावा गबन की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनवाई किए जाने के कुछ दिन बाद हुआ है, जिसमें एसआईटी को जांच के संबंध में वस्तुस्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था.
तीन सदस्यीय SIT कर रही जांच
उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर 3 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था. इसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन को शामिल किया गया है.
शुरुआती जांच के आधार पर उठाए जा चुके कई कदम
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अब तक कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा चुके हैं. इनमें FIR दर्ज होना, 8 आरोपियों की गिरफ्तारी, कथित रूप से दान की राशि की बरामदगी और ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय तथा पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे जैसे घटनाक्रम शामिल हैं.
22 जुलाई को होगी ट्रस्ट की बैठक
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन और दान गणना प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई सुधारात्मक सुझाव दिए जा सकते हैं. इन सिफारिशों पर चर्चा के लिए 22 जुलाई को अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक प्रस्तावित है.
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