Saturday, July 11, 2026
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‘प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाए काम’, रामजल सेतु लिंक परियोजना पर CM भजनलाल शर्मा के निर्देश

Rajasthan News: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रामजल सेतु लिंक परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण गुणवत्ता, नियमित मॉनिटरिंग और प्रभावित परिवारों के पारदर्शी पुनर्वास पर जोर दिया।

Rajasthan News: जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी रामजल सेतु लिंक परियोजना की प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाए, ताकि परियोजना का लाभ निर्धारित समय-सीमा से पहले ही प्रदेश की जनता तक पहुंच सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और प्रेरणा से साकार हो रही यह परियोजना पूर्वी राजस्थान के जल भविष्य को सुरक्षित करने की ऐतिहासिक पहल है. इससे प्रदेश के लाखों लोगों को पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होगा.

पूर्वी राजस्थान के विकास की आधारशिला बनेगी परियोजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामजल सेतु लिंक परियोजना केवल जल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूर्वी राजस्थान के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास की मजबूत नींव साबित होगी. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ तय समय में प्रत्येक चरण पूरा करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि परियोजना के सभी घटकों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए. साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए.

इन प्रमुख परियोजनाओं की हुई समीक्षा

बैठक में मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घटकों की प्रगति की समीक्षा की, जिनमें शामिल हैं बीसलपुर से मोर सागर (अजमेर), ईसरदा से बंध बारेठा (भरतपुर), ईसरदा से रामगढ़ (जयपुर), खुरा-चैनपुरा से जयसमंद (अलवर), ब्राह्मणी बैराज सहित विभिन्न घटकों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने इन सभी निर्माण कार्यों की सतत निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

पुनर्वास और मुआवजा पारदर्शी तरीके से देने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने परियोजना से प्रभावित परिवारों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्वास और मुआवजा संबंधी सभी कार्य पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और तय समयसीमा में पूरे किए जाएं, ताकि किसी भी प्रभावित परिवार को परेशानी का सामना न करना पड़े. उन्होंने कहा कि परियोजना से संबंधित अधिकारी कार्यों पर कड़ी निगरानी रखें, ताकि काम समय पर तो पूरा हो ही, क्वालिटी टेस्टिंग भी नियमित रूप से होती रहे.

24 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कार्य जारी

नवनेरा एवं ईसरदा बांध का निर्माण कार्य पूरा

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, जल संसाधन अभय कुमार ने बताया कि इस परियोजना के अंतर्गत 24 हजार करोड़ से अधिक के कार्य प्रगतिरत हैं। उन्होंने बताया कि नवनेरा बैराज एवं ईसरदा बांध का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। वहीं, रामगढ़ बैराज एवं महलपुर बैराज के ओवरफ्लो भाग का कार्य प्रगतिरत है, जिसके अन्तर्गत लगभग 600 क्यूबिक मीटर/प्रतिदिन कंक्रीटिंग का कार्य किया जा रहा है। इसी तरह परियोजना के अन्तर्गत एक महत्त्वपूर्ण घटक नवनेरा पम्प हाउस हेतु 10 लाख क्यूबिक मीटर मिट्टी खुदाई का कार्य भी प्रगतिरत है.

प्रमुख निर्माण कार्यों में तेजी

अधिकारियों ने बताया कि-नवनेरा बैराज से मेज एनीकट तक बनने वाली 19 किलोमीटर फीडर नहर में लगभग 8 किलोमीटर कार्य पूरा हो चुका है. चंबल एक्वाडक्ट के लिए प्रस्तावित 5,060 पाइलों में से करीब 3,700 पाइलों का निर्माण पूरा हो चुका है. मेज नदी से गलवा बांध, गलवा से ईसरदा तथा गलवा से बीसलपुर तक पंप हाउस और फीडर सिस्टम का कार्य भी तेजी से चल रहा है. ईसरदा से बंध बारेठा (भरतपुर) तक लगभग 180 किलोमीटर फीडर का निर्माण शुरू हो चुका है.

2,330 करोड़ रुपये से बन रहा चंबल एक्वाडक्ट

परियोजना के प्रथम चरण के तहत लगभग 2,330 करोड़ रुपये की लागत से चंबल एक्वाडक्ट का निर्माण किया जा रहा है. यह एक्वाडक्ट कोटा जिले के पीपलदा समेल गांव और बूंदी जिले के गोहाटा गांव को जोड़ेगा. इसके माध्यम से नवनेरा बैराज से पानी को मेज नदी तक पहुंचाया जाएगा, जहां से विभिन्न पंप हाउस और फीडर सिस्टम के जरिए पानी गलवा बांध, बीसलपुर और ईसरदा बांध तक पहुंचाया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को एक अतिरिक्त आवागमन मार्ग भी उपलब्ध होगा।

पहले चरण में 17 जिलों की 3.25 करोड़ आबादी को मिलेगा लाभ

राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती परियोजना का विस्तार करते हुए इसे रामजल सेतु लिंक परियोजना के रूप में विकसित किया है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 90 हजार करोड़ रुपये है. परियोजना के पहले चरण में प्रदेश के 17 जिलों की लगभग 3 करोड़ 25 लाख आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध होगी. साथ ही सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए पर्याप्त जल मिलने से पूर्वी राजस्थान के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी.

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Premanshu Chaturvedi
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