मुंबई (प्रज्ञा पांडे)। सिनेमाघरों में कई बार मुकाबला सिर्फ दो फिल्मों के बीच नहीं होता, बल्कि दो अलग-अलग भावनाओं के बीच होता है। इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कुछ ऐसा ही देखने को मिलने वाला है। एक तरफ होगी ऐसी कहानी जो देश के इतिहास के सबसे बड़े दर्द को छूने की कोशिश करेगी, वहीं दूसरी तरफ एक ऐसा किरदार वापसी करेगा जिसे फैंस ने सालों तक याद रखा है। 15 अगस्त के मौके पर बॉक्स ऑफिस पर सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ और इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ आमने-सामने होंगी। दोनों फिल्मों की दुनिया बिल्कुल अलग है, लेकिन रिलीज एक साथ होने की वजह से इनकी तुलना होना तय है।
इमरान हाशमी की फिल्म ‘आवारापन’ साल 2007 में रिलीज हुई थी। उस समय फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी कमाई नहीं की थी, लेकिन धीरे-धीरे यह फिल्म दर्शकों के बीच खास जगह बनाने में कामयाब रही। शिवम के किरदार की उदासी, इमोशन और फिल्म के गाने लोगों को पसंद आए। यही वजह है कि इतने साल बाद जब इसके दूसरे पार्ट की खबर आई, तो पुराने फैंस में उत्सुकता बढ़ गई। लेकिन यहां इमरान के सामने सबसे बड़ी चुनौती भी यही है। जिन लोगों ने पहली फिल्म को पसंद किया था, उनकी उम्मीदें ‘आवारापन 2’ से काफी ज्यादा होंगी। सीक्वल को सिर्फ पुरानी यादों के भरोसे नहीं, बल्कि एक मजबूत कहानी के साथ खुद को साबित करना होगा। वहीं सनी देओल की ‘बंटवारा 1947’ एक पीरियड ड्रामा है, जिसकी कहानी भारत के विभाजन के दौर के आसपास घूमती है।
1947 का बंटवारा भारतीय इतिहास की ऐसी घटना है, जिससे जुड़ी भावनाएं आज भी लोगों के बीच मौजूद हैं। विस्थापन, परिवारों का बिछड़ना और उस दौर की तकलीफें फिल्म का मुख्य आधार होंगी। इसके अलावा स्वतंत्रता दिवस के आसपास रिलीज होने वाली फिल्मों को अक्सर देशभक्ति के माहौल का फायदा मिलता है। सनी देओल की मजबूत स्क्रीन इमेज भी फिल्म के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट हो सकती है। ‘बंटवारा 1947’ जहां दर्शकों को इतिहास और भावनाओं से जोड़ने की कोशिश करेगी, वहीं ‘आवारापन 2’ पुराने रिश्तों और यादों को वापस लाने का प्रयास करेगी।
अब देखने वाली बात होगी कि दर्शक इस बार किस भावना के साथ ज्यादा जुड़ते हैं। क्या सनी देओल की देशभक्ति वाली कहानी बाजी मारेगी या फिर इमरान हाशमी का पुराना जादू एक बार फिर चल पाएगा? 15 अगस्त के बाद बॉक्स ऑफिस के आंकड़े ही बताएंगे कि दर्शकों ने किसे अपना प्यार दिया।



