चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले BJP ने ऐसा सियासी संदेश दिया है, जिसने शिरोमणि अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन की चर्चाओं को फिर गर्म कर दिया है। BJP की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि पार्टी राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इसे सिर्फ चुनावी तैयारी नहीं, बल्कि अकाली दल के साथ संभावित सीट बंटवारे की बातचीत में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
BJP और अकाली दल का गठबंधन पंजाब की राजनीति में कई दशकों तक अहम रहा। दोनों पार्टियां लंबे समय तक मिलकर चुनाव लड़ती रहीं, लेकिन सीटों के बंटवारे में अकाली दल का दबदबा रहा। BJP सीमित सीटों पर चुनाव लड़ती थी। 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए और इसके बाद BJP ने राज्य में अपने संगठन का विस्तार करने पर ज्यादा जोर दिया।
2022 के विधानसभा चुनाव में BJP ने सभी 117 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव मैदान में थीं। इस दौरान BJP ने अपने पारंपरिक शहरी और हिंदू मतदाताओं से आगे पकड़ बनाने की कोशिश की। पार्टी अब खुद को पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत स्थिति में मानती है।
इसी बदले राजनीतिक समीकरण के बीच BJP का 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा महत्वपूर्ण हो जाता है। अगर दोनों दलों के बीच दोबारा गठबंधन होता है तो सीटों का बंटवारा सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है। BJP अब पुराने फॉर्मूले के बजाय अपने मौजूदा राजनीतिक प्रभाव के आधार पर ज्यादा सीटों की हिस्सेदारी चाह सकती है।
दूसरी तरफ अकाली दल के लिए भी BJP के साथ संबंधों को लेकर कई राजनीतिक और सामाजिक समीकरण जुड़े हुए हैं। पार्टी को अपनी पारंपरिक सियासी जमीन बचाने के साथ-साथ आगामी चुनाव में मजबूत चुनौती का सामना करना है। ऐसे में दोनों दलों के बीच बातचीत में सीटों के अलावा नेतृत्व और चुनावी रणनीति भी महत्वपूर्ण मुद्दे बन सकते हैं।
पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पहले से ही मजबूत दावेदार हैं। ऐसे में BJP और अकाली दल अगर अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं तो मुकाबला और ज्यादा बहुकोणीय हो सकता है। वहीं गठबंधन की स्थिति में दोनों दल अपने वोट आधार को एक साथ लाने की कोशिश करेंगे।
फिलहाल BJP का अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान अकाली दल के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। पार्टी वास्तव में अकेले मैदान में उतरती है या बातचीत के बाद गठबंधन का रास्ता चुनती है, इसका फैसला आने वाले महीनों में होगा। लेकिन इतना तय है कि इस बार BJP पंजाब में खुद को पुराने गठबंधन की छोटी सहयोगी भूमिका तक सीमित रखने के मूड में नहीं दिख रही।



