जोधपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कारों और कर्तव्यों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ऋषि-मुनियों और संत-महात्माओं की शिक्षाएं आज भी समाज को सही दिशा प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कानून समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्य और परंपराओं से मिलने वाली सीख आज भी प्रासंगिक हैं। बड़ों के प्रति सम्मान, परिवार के प्रति जिम्मेदारी और अपने कर्तव्यों का पालन हमारी संस्कृति का मूल आधार है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जोधपुर जिले में केलावा खुर्द हेलीपैड पहुंचे, जहां से वे रघुवंश पुरम आश्रम में आयोजित रामकथा कार्यक्रम में शामिल हुए। रामकथा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रामराज की स्थापना कर्तव्यों के पालन से हुई थी। आज समाज में अधिकारों की चर्चा तो होती है, लेकिन कई बार कर्तव्यों को पीछे छोड़ दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज में संस्कार, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखना है, तो प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा।
‘अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन कर्तव्यों को पीछे छोड़ रहे’
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं, लेकिन उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति भी उतना ही सजग रहना चाहिए। परिवार और समाज की व्यवस्था तभी मजबूत रह सकती है, जब प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाए। उन्होंने पुत्र, बेटी, माता और बहन सहित परिवार के प्रत्येक सदस्य के कर्तव्यों को समझने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री के अनुसार, बड़ों के प्रति मान-सम्मान भारतीय संस्कृति की बुनियाद है। परिवार में संस्कार और मर्यादा बनाए रखने के लिए आपसी सम्मान तथा जिम्मेदारी की भावना जरूरी है। उन्होंने कहा कि रामराज की परिकल्पना केवल आदर्श शासन व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के आचरण, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ी हुई है। जब लोग अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे, तभी समाज में आदर्श व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
‘ऋषि-मुनियों और संतों की सीख आज भी प्रासंगिक’
मुख्यमंत्री ने भारतीय संस्कृति की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऋषि-मुनियों और संतों द्वारा बताए गए जीवन मूल्य हजारों वर्षों से समाज का मार्गदर्शन करते आ रहे हैं। समय के साथ कानून और व्यवस्थाएं बदल सकती हैं, लेकिन नैतिकता, सम्मान, मर्यादा और कर्तव्य जैसे मूल्यों का महत्व बना रहता है। उन्होंने कहा कि संत-महात्मा समाज को सही और गलत के बीच अंतर समझाने का काम करते हैं। उनकी शिक्षाएं लोगों को जीवन में सही रास्ता चुनने और गलत दिशा में जाने से बचने की प्रेरणा देती हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, धार्मिक कथाएं केवल आध्यात्मिक ज्ञान तक सीमित नहीं हैं। इनके माध्यम से लोगों को पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक व्यवहार और जीवन में अनुशासन का संदेश भी मिलता है।
‘मैं ईश्वरवादी व्यक्ति हूं’, रामकथा के प्रति जताई श्रद्धा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में अपनी धार्मिक आस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वे ईश्वर में विश्वास रखने वाले व्यक्ति हैं और रामकथा के प्रति उनकी विशेष श्रद्धा रही है। उन्होंने बताया कि वे पहले भी रामकथा सुनने के लिए बिना औपचारिक निमंत्रण के पहुंच जाते थे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कर्म को महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। केवल अधिकारों की अपेक्षा करने के बजाय अपने कर्म और जिम्मेदारियों पर ध्यान देना आवश्यक है। उनके संबोधन में धार्मिक आस्था के साथ कर्म, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों का संदेश प्रमुख रहा।
मुरलीधर महाराज के प्रति जताया सम्मान, पुराने संबंधों का किया जिक्र
रामकथा कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुरलीधर महाराज के चरणों में प्रणाम कर उनका सम्मान किया। उन्होंने संत-महात्माओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संत समाज को सही दिशा दिखाते हैं और लोगों को जीवन में अच्छे आचरण के लिए प्रेरित करते हैं। मुख्यमंत्री ने मुरलीधर महाराज के साथ अपने पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके पिता भी कई बार आश्रम आकर महाराज की कथा सुन चुके हैं। इस प्रसंग के जरिए उन्होंने अपने परिवार की धार्मिक परंपराओं और कथा-श्रवण के प्रति श्रद्धा का जिक्र किया। उन्होंने रामकथा, भागवत कथा और हनुमान कथा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि संतों का सान्निध्य व्यक्ति को जीवन के मूल्यों को समझने का अवसर देता है।
‘संत समाज को भटकने से बचाकर सही मार्ग दिखाते हैं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत-महात्मा समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने और लोगों को सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे अपने उपदेशों के माध्यम से लोगों को गलत कार्यों से दूर रहने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों और कथाओं से लोगों को जीवन जीने की बेहतर समझ मिलती है। इनके जरिए परिवार, समाज और व्यक्तिगत आचरण में मर्यादा बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री का संदेश था कि समाज की मजबूती के लिए केवल अधिकारों की जानकारी पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों, परिवार के प्रति सम्मान और सामाजिक कर्तव्यों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
रामराज की परिकल्पना के लिए जरूरी हैं संस्कार और कर्तव्य
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संबोधन का मुख्य संदेश यह रहा कि आदर्श समाज का निर्माण कर्तव्यनिष्ठा, संस्कार और नैतिक मूल्यों के आधार पर ही संभव है। भारतीय संस्कृति में बड़ों का सम्मान, परिवार के प्रति जिम्मेदारी और समाज के हित में कार्य करने की परंपरा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि संतों और महापुरुषों की शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर समाज को बेहतर दिशा दी जा सकती है। रामराज की परिकल्पना को साकार करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने आचरण में मर्यादा और कर्तव्यपालन को महत्व देना होगा।



