बांसवाड़ा। राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। बांसवाड़ा जिला परिषद की कई सीटों पर इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। कहीं भाजपा, कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के उम्मीदवार आमने-सामने हैं, तो कहीं टिकट नहीं मिलने से नाराज नेताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतरकर अपनी ही पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कुछ सीटों पर पूर्व जनप्रतिनिधियों और नेताओं के परिवार के सदस्यों की दावेदारी ने भी चुनाव को चर्चा में ला दिया है। यही वजह है कि जिला परिषद के वार्ड 4, 6, 11, 24, 27, 28, 31 और 32 पर राजनीतिक दलों के साथ स्थानीय मतदाताओं की भी खास नजर है।
वार्ड 4: कांग्रेस के बागी ने मुकाबले को बनाया चतुष्कोणीय
जिला परिषद का वार्ड 4 इस बार चार उम्मीदवारों के मैदान में होने से चर्चा में है। यहां कांग्रेस ने दीप्ति, भाजपा ने भूपेंद्र सिंह और भारत आदिवासी पार्टी ने विनोद को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे विनोद पाठक ने मुकाबले को और रोचक बना दिया है।
विनोद पाठक कांग्रेस के सरेड़ी ब्लॉक अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्होंने जिला परिषद के इस वार्ड से पार्टी का टिकट मांगा था, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। उन्होंने सेवादल से भी इस्तीफा दे दिया। अब इस सीट पर चार प्रत्याशी मैदान में हैं और बागी उम्मीदवार की मौजूदगी ने मुकाबले के समीकरण बदल दिए हैं।
यह खबर भी पढ़ें:-लॉरेंस बिश्नोई के भांजे की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती
वार्ड 6: तीन पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर
वार्ड 6 को जिला परिषद की प्रमुख हॉट सीटों में गिना जा रहा है। यहां भाजपा ने प्रियंका कुंवर, कांग्रेस ने संगीता और BAP ने रीना सावड़ा को मैदान में उतारा है। तीनों प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के आमने-सामने होने से मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है।
कांग्रेस प्रत्याशी संगीता पूर्व उप जिला प्रमुख रह चुकी हैं। ऐसे में इस सीट पर उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा भी जुड़ी हुई है। अब देखना होगा कि तीनों दलों के बीच होने वाले मुकाबले में मतदाता किस उम्मीदवार के पक्ष में फैसला सुनाते हैं।
वार्ड 11: भाजपा, कांग्रेस और BAP के साथ निर्दलीय भी मैदान में
वार्ड 11 में तीन प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के अलावा दो निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने खेमराज गरासिया, कांग्रेस ने दौलतराम और BAP ने दिलीप कटारा को टिकट दिया है। इनके अलावा कांतिलाल और गोविंदलाल खाट निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।
भाजपा प्रत्याशी खेमराज गरासिया पहले कांग्रेस में रह चुके हैं। वह पूर्व में दो बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीया के सामने चुनाव लड़ चुके हैं। उनकी पत्नी दो बार आनंदपुरी की प्रधान भी रह चुकी हैं। इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे गरासिया की दावेदारी ने इस वार्ड को चर्चा में ला दिया है।
वार्ड 24: कांग्रेस के बागी धीरजमल ने बढ़ाई मुकाबले की दिलचस्पी
वार्ड 24 में कांग्रेस ने जमनालाल, भाजपा ने विकास और भारत आदिवासी पार्टी ने विनोद को प्रत्याशी बनाया है। वहीं, कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद धीरजमल निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। तीन प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के बीच कांग्रेस के बागी की मौजूदगी से मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है। इस सीट पर धीरजमल की दावेदारी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है।
वार्ड 27: बागी सोहनलाल की दावेदारी से मुकाबला चार तरफा
वार्ड 27 में भी चार प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस ने अनिल, BAP ने महिपाल डामोर और भाजपा ने सरदार सिंह को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, कांग्रेस से बगावत कर सोहनलाल निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं।
इस सीट पर भी बागी उम्मीदवार की मौजूदगी के कारण मुकाबला चतुष्कोणीय हो गया है। अब चुनावी नतीजे ही बताएंगे कि निर्दलीय प्रत्याशी कितने प्रभावी साबित होते हैं और प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला किस दिशा में जाता है।
यह खबर भी पढ़ें:-वोटिंग से एक दिन पहले कांग्रेस प्रत्याशी की मौत, 22 अक्टूबर को नहीं टलेगा मतदान
वार्ड 28: विधायक रमिला खड़िया के बेटे रोहित पहली बार चुनाव मैदान में
वार्ड 28 पर भी लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। कुशलगढ़ विधायक रमिला खड़िया के बेटे रोहित खड़िया पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। उनके मैदान में उतरने से यह सीट चर्चा में आ गई है।
रोहित खड़िया को चुनौती देने के लिए BAP ने देवचंद मईड़ा और भाजपा ने वजहिंग मईड़ा को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में इस वार्ड में तीनों दलों के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। रोहित के लिए यह पहला चुनावी अनुभव है, जबकि दूसरी ओर भाजपा और BAP ने भी अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए उम्मीदवार उतारे हैं।
वार्ड 31: पूर्व सरपंच सुभाष निनामा की प्रतिष्ठा दांव पर
वार्ड 31 में कांग्रेस ने वीरपुर के पूर्व सरपंच सुभाष निनामा को चुनाव मैदान में उतारा है। उनके मुकाबले भाजपा से मानशंकर और भारत आदिवासी पार्टी से सोहनलाल डोडियार चुनाव लड़ रहे हैं।
तीनों दलों के प्रत्याशियों के बीच मुकाबले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। इस सीट पर स्थानीय समीकरण और उम्मीदवारों का क्षेत्र में संपर्क चुनावी चर्चा के अहम पहलू बने हुए हैं।
वार्ड 32: विधायक-पुत्र विकास बामणिया और निवर्तमान प्रधान बलवीर रावत आमने-सामने
वार्ड 32 जिला परिषद की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। यहां निवर्तमान उप जिला प्रमुख और विधायक-पुत्र विकास बामणिया चुनाव मैदान में हैं। दूसरी ओर भाजपा ने बांसवाड़ा पंचायत समिति के निवर्तमान प्रधान बलवीर रावत को प्रत्याशी बनाया है।
दोनों उम्मीदवारों को अपनी-अपनी पार्टी में जिला प्रमुख पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ जिला परिषद सदस्य की सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके परिणाम को जिला प्रमुख पद के संभावित समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। इसी वार्ड में बलवीर नाम के एक निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनाव लड़ रहे हैं।
बांसवाड़ा में बागियों और दिग्गजों की प्रतिष्ठा का सवाल
बांसवाड़ा जिला परिषद की इन सीटों पर इस बार चुनावी तस्वीर कई वजहों से दिलचस्प बनी हुई है। कहीं भाजपा, कांग्रेस और BAP के बीच सीधी टक्कर है, तो कहीं बागी उम्मीदवारों ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया है। वहीं, नेताओं के परिवार से जुड़े प्रत्याशियों की मौजूदगी ने भी कुछ वार्डों को चर्चा में ला दिया है।
अब इन सीटों पर उम्मीदवारों की राजनीतिक पकड़, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं का रुख अहम होगा। चुनाव परिणाम ही तय करेंगे कि बागियों की चुनौती किस दल पर कितना असर डालती है और दिग्गजों से जुड़े प्रत्याशी अपनी राजनीतिक जमीन कितनी मजबूत कर पाते हैं।



