Thursday, August 6, 2026
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वीडियो कॉल पर पिता को दी आखिरी विदाई, बेटियां नहीं पहुंच पाईं….5100 भेजकर बोलीं- “अंतिम संस्कार अच्छे से करा देना”

मुंबई के कपड़ा कारोबारी शिवचरण रामरत्न गुप्ता का सोनीपत के वृद्धाश्रम में निधन हो गया था। परिवार की गैरमौजूदगी में आश्रम प्रबंधन ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था की थी। बेटियां वीडियो कॉल के जरिए अंतिम संस्कार में शामिल हुईं, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आया है।

सोनीपत (प्रज्ञा पांडे)। हरियाणा के सोनीपत से एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने बुजुर्गों के अकेलेपन और बदलते पारिवारिक रिश्तों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। मुंबई के कपड़ा कारोबारी रहे 74 वर्षीय शिवचरण रामरत्न गुप्ता का निधन सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में हुआ। अंतिम विदाई के समय उनकी बेटियां मौके पर मौजूद नहीं थीं, लेकिन उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता को आखिरी बार देखा।

जानकारी के अनुसार, शिवचरण गुप्ता पिछले करीब तीन वर्षों से सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे। बताया गया कि उनकी पत्नी का निधन भी इसी वृद्धाश्रम में हुआ था। पत्नी के जाने के बाद उनका जीवन और भी अकेला हो गया था। बढ़ती उम्र और बदलती परिस्थितियों के कारण उन्होंने अपने जीवन का अंतिम समय वृद्धाश्रम में बिताया। वृद्धाश्रम प्रबंधन ने मंगलवार को शिवचरण गुप्ता के निधन की सूचना उनके परिवार को दी। उनकी बेटियां अलग-अलग जगहों पर रहती हैं और किसी कारणवश तुरंत सोनीपत नहीं पहुंच सकीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, बेटियों ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए 5100 रुपये भेजे और वृद्धाश्रम प्रबंधन से पिता का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ कराने की अपील की। अंतिम संस्कार के दौरान बेटियां वीडियो कॉल के माध्यम से जुड़ीं और मोबाइल स्क्रीन के जरिए पिता को अंतिम विदाई दी। बताया जाता है कि शिवचरण गुप्ता ने अपनी बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया था। उनकी बेटियां शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। एक पिता के तौर पर उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया। हालांकि, जीवन के आखिरी पड़ाव में उनका वृद्धाश्रम में रहना और अंतिम विदाई के समय बेटियों का शारीरिक रूप से मौजूद नहीं होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक हालात की तस्वीर भी दिखाती है। आज नौकरी, जिम्मेदारियों और अलग-अलग शहरों में रहने के कारण कई परिवारों में बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं। तकनीक ने दूर बैठे लोगों को जोड़ने का काम जरूर किया है, लेकिन कई बार आखिरी समय में अपनों की मौजूदगी की कमी को पूरा नहीं कर पाती। शिवचरण गुप्ता की अंतिम विदाई ने बुजुर्गों की भावनात्मक जरूरतों और परिवार के साथ जुड़े रहने की अहमियत पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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