Monday, March 9, 2026
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West Asia Crisis Shipping Cost : पश्चिम एशिया संकट से माल भाड़ा 300% बढ़ा, FIEO ऑर्गेनाइजेशन ने जहाज और लॉजिस्टिक्स बढ़ाए

पश्चिम एशिया संकट के कारण समुद्री माल भाड़ा 300% तक बढ़ने से भारत-खादी व्यापार प्रभावित हुआ है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन के समन्वयक अजय सहाय ने बताया कि 15 अप्रैल से भारत और खाड़ी देशों के बीच छोटे जहाजों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों (NVOCC) की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही एक्सपोर्टकों की पेमेंट और बैंकिंग समस्याओं को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से भी राहत देने का अनुरोध किया गया है।

West Asia Crisis Shipping Cost : नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट के कारण समुद्री माल भाड़ा 300 प्रतिशत तक बढ़ जाने के बीच भारत और खाड़ी देशों के बीच 15 अप्रैल से भारत और खाड़ी देशों के बीच छोटे जहाजों और मालवाहक कंपनियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। भारतीय निर्यातकों के संघों के महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने सोमवार को यह जानकारी दी। सहाय ने बताया कि अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के कारण उत्पन्न संकट के कारण निर्यातकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर निर्यातकों और पोत परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के साथ बैठक हुई, जिसमें लगभग 400 निर्यातकों ने भाग लिया। बैठक में उन्होंने कंटेनर की आवाजाही में आने वाली मुश्किलों को साझा किया।

पश्चिम एशिया संकट से समुद्री माल भाड़ा 300% बढ़ा

फियो के महानिदेशक ने कहा, ‘‘निर्णय लिया गया है कि 15 अप्रैल से भारत और पश्चिम एशियाई देशों के बीच ‘नॉन-वेसल ऑपरेटिंग कॉमन कैरियर्स’ (एनवीओसीसी) की संख्या बढ़ाई जाएगी। यह कदम निर्यातित माल को जल्दी पहुंचाने में मदद करेगा।’’ एनवीओसीसी ऐसी लॉजिस्टिक्स कंपनी होती हैं जो समुद्र के रास्ते माल परिवहन की सेवाएं प्रदान करती है, लेकिन इसके पास अपने जहाज नहीं होते हैं।

सहाय ने बताया कि युद्ध के कारण समुद्री और हवाई माल भाड़ा दोनों में वृद्धि हुई है। विदेशी पोत परिवहन कंपनियां अतिरिक्त शुल्क (सुरक्षा शुल्क) लगा रही हैं, जो 1,500 से 4,000 डॉलर के बीच है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, ‘कोलकाता से पश्चिम एशिया तक हवाई माल भाड़ा 190 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 430 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है।’

सहाय ने यह भी बताया कि निर्यातकों की बैंकिंग समस्याओं को हल करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ बैठक की गई। युद्ध के कारण निर्यातकों को अपने भुगतान समय पर नहीं मिल पाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘भुगतान में देरी होने पर निर्यातकों को ब्याज सहायता और अन्य बैंकिंग सुविधाओं में दिक्कतें आती हैं। हमने आरबीआई से अनुरोध किया है कि वह बैंकों इस मामले में निर्देश दे।’ निर्यातकों ने सरकार से अनुरोध किया है कि इस संकट को अप्रत्याशित आपदा के रूप में मान्यता दी जाए। इससे वे संविदात्मक दंडों से बच सकते हैं।

Mukesh Kumar
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