मणिपुर में जातीय तनाव का एक नया अध्याय खुल गया है। पिछले तीन वर्षों से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच हिंसा झेल रहे राज्य में अब कुकी और नगा समुदायों के बीच टकराव तेज हो गया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पिछले चार महीनों में 20 लोगों की हत्या, 48 लोगों के अपहरण और 50 से अधिक घरों को आग के हवाले किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
तनाव की शुरुआत फरवरी 2026 में उखरुल जिले के एक छोटे से विवाद से हुई, जिसने धीरे-धीरे जातीय संघर्ष का रूप ले लिया। इसके बाद कई गांवों में आगजनी, हिंसा और अपहरण की घटनाएं बढ़ने लगीं। जून में हालात तब और गंभीर हो गए जब छह नगा लोगों के अधकटे शव बरामद किए गए। इन लोगों का मई में कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया था।नगा संगठनों ने इस घटना के लिए कुकी उग्रवादी समूहों को जिम्मेदार ठहराते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं कुकी समुदाय के नेताओं का आरोप है कि उनके इलाकों में जरूरी सामानों की आपूर्ति बाधित की जा रही है, जिससे लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष केवल हालिया घटनाओं का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे दशकों पुरानी सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा भी है। वर्ष 1992 में भी कुकी और नगा समुदायों के बीच भीषण संघर्ष हुआ था, जिसमें करीब एक हजार लोगों की जान गई थी और हजारों लोग विस्थापित हुए थे।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने कई मामलों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है। सुरक्षा बल लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं और अब तक कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, स्थानीय लोगों में डर का माहौल बना हुआ है और उन्हें आशंका है कि यदि समय रहते हालात नहीं संभाले गए तो मणिपुर एक बार फिर बड़े जातीय संघर्ष की चपेट में आ सकता है।



