जयपुर। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के राष्ट्रीय नेता और बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत ने गुजरात के आदिवासी विधायक चैतर भाई वसावा को सात साल की सजा सुनाए जाने के बाद भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आरोप लगाया कि आदिवासी, दलित, गरीब और किसानों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले नेताओं को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है।
राजकुमार रोत ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि यह न्याय नहीं बल्कि बदले की राजनीति है। उन्होंने कहा कि भारत आदिवासी पार्टी चैतर भाई वसावा के साथ मजबूती से खड़ी है और उनके समर्थन में जल्द ही गुजरात में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
चैतर भाई वसावा की सजा पर गरमाई सियासत
गुजरात के आदिवासी नेता चैतर भाई वसावा लंबे समय से आदिवासी समाज, भूमि अधिकार और वन अधिकार जैसे मुद्दों को उठाते रहे हैं। उन्हें हाल ही में एक मामले में सात साल की सजा सुनाई गई है। इस फैसले के बाद गुजरात और राजस्थान की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। राजकुमार रोत ने आरोप लगाया कि जो नेता आदिवासी समाज के हक की आवाज बुलंद करते हैं, उन्हें राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है।
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माही नदी के पानी को लेकर भी सरकार को घेरा
चैतर भाई वसावा के मुद्दे के साथ ही राजकुमार रोत ने राजस्थान सरकार को माही नदी के पानी के बंटवारे को लेकर भी घेरा है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जल संसाधन मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि माही नदी का पानी पश्चिमी राजस्थान भेजने से पहले दक्षिण राजस्थान के आदिवासी जिलों की पेयजल और सिंचाई की जरूरतें पूरी की जाएं।
5900 करोड़ की योजना पर उठाए सवाल
राजस्थान सरकार ने बजट 2026-27 में माही नदी बेसिन के अतिरिक्त पानी को फीडर कैनाल के माध्यम से जालौर सहित पश्चिमी राजस्थान के जिलों तक पहुंचाने के लिए करीब 5900 करोड़ रुपये की योजना घोषित की है। हालांकि सांसद राजकुमार रोत का कहना है कि बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जैसे आदिवासी जिले आज भी पेयजल और सिंचाई संकट से जूझ रहे हैं। ऐसे में स्थानीय जरूरतें पूरी किए बिना दूसरे क्षेत्रों में पानी भेजना उचित नहीं होगा।
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“पहला अधिकार स्थानीय आदिवासियों और किसानों का”
रोत ने कहा कि दक्षिण राजस्थान की नदियों का बड़ा हिस्सा गुजरात की ओर बह जाता है, जबकि पर्याप्त जल भंडारण और सिंचाई ढांचे की कमी के कारण स्थानीय किसान हर साल पानी के संकट का सामना करते हैं। उन्होंने मांग की कि पहले आदिवासी क्षेत्रों में सिंचाई परियोजनाओं और पेयजल व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पानी की कमी के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार की तलाश में पलायन करना पड़ता है। इसलिए माही नदी के पानी पर पहला अधिकार स्थानीय किसानों और आदिवासी समाज का होना चाहिए।
दोनों मुद्दों पर आंदोलन तेज करने के संकेत
राजकुमार रोत के बयानों से साफ है कि भारत आदिवासी पार्टी आने वाले दिनों में चैतर भाई वसावा के समर्थन और माही नदी के पानी के मुद्दे पर अपना आंदोलन तेज कर सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि गुजरात और राजस्थान सरकार इन मुद्दों पर क्या रुख अपनाती हैं।



