नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर चल रही भूख हड़ताल के बीच शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। उनके अनिश्चितकालीन अनशन का मंगलवार को 17वां दिन है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का दावा है कि इस दौरान वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलो तक कम हो चुका है। आयोजकों के मुताबिक, उनका ब्लड प्रेशर सामान्य से नीचे बना हुआ है और लगातार वजन घटने की वजह से शरीर में मसल लॉस के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टर नियमित रूप से उनकी स्वास्थ्य जांच कर रहे हैं। हालांकि बिगड़ती सेहत के बावजूद सोनम वांगचुक अपने फैसले पर कायम हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत डिपके ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने वांगचुक से कई बार अनशन खत्म करने की अपील की, लेकिन उनका जवाब साफ था। दीपके के मुताबिक, वांगचुक ने कहा, “मुझसे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए। सरकार से पूछिए कि वह अब तक बातचीत के लिए आगे क्यों नहीं आई।” यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर काफी चर्चा हो रही है।
इससे पहले सोमवार को CJP ने एक और हेल्थ अपडेट साझा किया था। CJP के अनुसार, अनशन के 16वें दिन तक वांगचुक का वजन 8.2 किलो कम हो चुका था, उनका ब्लड ग्लूकोज 67 mg/dL रिकॉर्ड किया गया और ब्लड प्रेशर 107/70 mmHg था। मंगलवार को जारी ताजा अपडेट में संगठन ने दावा किया कि वजन घटकर करीब 8.5 किलो तक पहुंच गया है, जबकि ब्लड प्रेशर 109/70 mmHg दर्ज किया गया। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रहे हेल्थ अपडेट ने समर्थकों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। इसी बीच जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान एक और स्वास्थ्य संबंधी घटना सामने आई। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने दावा किया कि संगठन की एक छात्रा, जो भूख हड़ताल पर बैठी थी, हाइपोवोलेमिक शॉक की वजह से अस्पताल में भर्ती करानी पड़ी। छात्र संगठन ने इसे लंबे समय से जारी अनशन का गंभीर असर बताया और सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर जल्द बातचीत शुरू करने की अपील की। सोनम वांगचुक की बिगड़ती तबीयत को लेकर अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वांगचुक का आंदोलन देशभर के युवाओं को एकजुट करने में सफल रहा है और अब उन्हें अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने उनसे अनशन खत्म कर लोकतांत्रिक तरीके से लड़ाई जारी रखने की अपील की।
आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी भी जंतर-मंतर पहुंचीं और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने आंदोलन के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। वहीं शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी आंदोलन के प्रति समर्थन जताया, लेकिन साथ ही सोनम वांगचुक से अपनी भूख हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया। CPI(M) के सांसद अमरा राम और पार्टी के अन्य नेताओं ने भी प्रदर्शन स्थल पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया।
दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी ने 20 जून को जंतर-मंतर पर कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ यह आंदोलन शुरू किया था। संगठन का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया है। इसी आंदोलन के समर्थन में 28 जून को सोनम वांगचुक भी जंतर-मंतर पहुंचे और उसी दिन से उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, वे कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और परीक्षा विवादों से जुड़े कथित छात्र आत्महत्या मामलों में प्रभावित परिवारों को एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी उठा रहे हैं। संगठन ने 20 जुलाई, यानी संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। अनशन के 17 दिन पूरे होने के साथ अब आंदोलन का सबसे संवेदनशील पहलू सोनम वांगचुक की सेहत बन गया है। जहां समर्थक सरकार से बातचीत शुरू करने की मांग कर रहे हैं, वहीं अब तक केंद्र की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार प्रदर्शनकारियों से संवाद करेगी या फिर यह भूख हड़ताल आने वाले दिनों में और लंबी चलेगी।



