जयपुर। (दीपक आजाद) शहर के नगर निगम चुनाव में बाहरी प्रत्याशी होने का मामला लगातार तूल पकडता जा रहा है। पैराशूट केंडिटेट्स को लेकर बवाल सातवें आसमान पर है। लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर अचानक किसी बाहरी को टिकट देना ग्रास रूट लेवल के कार्यकर्ता को नापसंद आ रहा है। बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में इसको लेकर खींचतान परवान पर है, और ग्राउंड लेवल पर सत्ता के संग्राम के साथ अंदरूनी घमासान और कलह सातवें आसमान पर नजर आ रहा है।
कुछ ऐसा ही हाल जयपुर नगर निगम चुनाव में वार्ड नम्बर 35 का है। जहां बीजेपी नेताओं और बीजेपी संगठन के करीबी रहे विमल कटियार ने अपने रिश्तों और पार्टी में पैंठ के दम पर वार्ड 35 (Jaipur Nagar Nigam Ward 35) से टिकट तो ले लिया, लेकिन जीत के समीकरण इसके साथ ही सुस्त हो चले। क्योंकि संघ के बिना ग्राउंड लेवल पर बाहरी प्रत्याशी का सीट निकालना मुश्किल है।
बता दें कि जयपुर नगर निगम के वार्ड नम्बर 35 (Jaipur Nagar Nigam Ward 35) से भाजपा के प्रत्याशी विमल कटियार, कांग्रेस के अनिल माथुर और निर्दलीय के तौर पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता देवेन्द्र कुमार शर्मा अपनी पूरी तैयारी से चुनाव प्रचार में उतर चुके हैं। परंतु इन सबके बीच भाजपा के लिये हालात चिंताजनक कहे जा सकते हैं। खबर के अनुसार भाजपा के इस सीट पर विमल कटियार के नाम पर अभी तक भाजपा के सामान्य कार्यकर्ताओं की सहमती तक नहीं बनी है। उस पर भाजपा के मूल संगठन के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने अपना प्रतिनिधि बनाकर सामाजिक कार्यकर्ता देवेन्द्र कुमार शर्मा को मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतार दिया। जिसके बाद भाजपा के प्रत्याशी के मनोबल में कमजोरी दिखाई दे रही है। हालांकि भाजपा प्रत्याशी कटियार लगातार खुद के स्थानीय स्तर पर सक्रिय होने और स्थानीय निवासी होने का दावा कर रहे हैं।
दूसरी तरफ संघ के लगातार सक्रिय सदस्य देवेन्द्र कुमार शर्मा क्षेत्र के ही निवासी हैं और लगातार चुनावी माहौल में संघ के निर्देश पर हमेशा बीजेपी को ग्रास रूट पर मजबूत करते रहे हैं। वो बीजेपी से टिकट पाने के प्रबल दावेदार भी थे लेकिन किस्मत और एप्रोच का गणित सटिक नहीं बैठ पाने से मामला बिगड़ गया और उनका टिकट कट गया। पर इन सबके बावजूद वो मैदान में डटे हुए हैं और अब ना केवल बीजेपी प्रत्याशी के चुनौती बने हुए हैं बल्कि कांग्रेस प्रत्याशी अनिल माथुर को भी सीधा टक्कर दे रहे हैं। देवेन्द्र कुमार शर्मा पिछले कई सालों से इसी वार्ड में एक जनसेवक के रूप में सक्रिय रहे हैं, निर्विवाद और स्वच्छ छवि के चलते जनता के सुख दुख में हमेशा सबसे आगे और सक्रिय नजर आए हैं।
हालांकि बीजेपी जैसे मजबूत संगठन के आगे देवेन्द्र कुमार शर्मा का यह मुकाबला कठिन है तो रोचक भी। लेकिन इस बीच कांग्रेस सोच रही है कि उनकी बल्ले हो जाएगी। पर ऐसा नहीं है। कांग्रेस ने जिस प्रत्याशी अनिल माथुर को मैदान में उतारा है उनके भी पुराने राजनीतिक दुश्मन कम नहीं हैं और उनके खिलाफ लगातार जालसाजी और अपराध से जुड़े मुकदमों की फाइलें खोलकर बैठे हैं।
ऐसे में तीनों ही प्रत्याशियों में अब रोचक मुकाबला होने जा रहा है। बड़ी बात यह है कि जेन जी का एक बडा तबका भी युवा होने के कारण निर्दलीय प्रत्याशी देवेन्द्र कुमार शर्मा के साथ है, वहीं स्थानीय होना उनको काफी सूट कर रहा है। पर देवेन्द्र कुमार शर्मा के सामने जीतना आसान भी नहीं होगा। क्योंकि पार्टी के दम पर टिकट के साथ चुनाव लड़ना और निर्दलीय चुनाव में ताल ठोकना चुनौतिपूर्ण तो है। ऐसे में अब सबकी नजरें 11 सितंबर को होने वाले मतदान पर है। देखना होगा इस रोचक त्रिकोणीय मुकाबले में व्यक्तिगत छवि के आधार पर वोट डाले जाएंगे या यह चुनाव दो पार्टियों के बीच सिमट कर रह जाएगा।



