Monday, February 23, 2026
HomePush NotificationSMS Hospital Jaipur: बार-बार लगने वाली आग रोकने के लिए कब होगी...

SMS Hospital Jaipur: बार-बार लगने वाली आग रोकने के लिए कब होगी ‘जाग’

SMS Hospital Jaipur: जयपुर के एसएमएस अस्पताल में बार-बार आग लगने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। डेढ़-दो साल में करीब 18 हादसे और पिछले साल ICU में 6 मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद फायर सेफ्टी सुधार के ठोस कदम नहीं उठे, जांच रिपोर्टें भी सार्वजनिक नहीं हुईं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रतीक चौवे, संपादक

जयपुर के एसएमएस अस्पताल में फिर दो बार आग लगी, हालांकि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, एक मरीज जरूर गंभीर रूप से झुलस गया। आग इमरजेंसी के मुख्य भवन में एक इलेक्ट्रिकल पैनल में लगी, वहीं दूसरा हादसा शनिवार को धन्वंतरि ब्लॉक के ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी के दौरान कॉर्टरी मशीन में शॉर्ट सर्किट से हुआ जिसमें एक मरीज झुलस गया। पिछले डेढ़-दो साल में आग लगने की करीब 18 घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले साल अक्टूबर में तो ट्रोमा सेंटर के आईसीयू में लगी आग के चलते दम घुटने से 6 मरीजों की मौत भी हो गई। बार-बार लगने वाली आग यह बताती है कि फायर सेफ्टी सिस्टम ठीक नहीं है। कभी ब्लॉक की पुरानी लैब तो कभी केमिस्ट के पास। कभी बेसमेंट, स्ट्रेचर रूम तो कभी अन्य संवेदनशील स्थानों पर बार-बार लगी आग, यह बताती है कि व्यवस्था में कहीं कोई खामी है। यह अस्पताल न केवल जयपुर, बल्कि पूरे प्रदेश के मरीजों के लिए जीवनरेखा है। ऐसे संस्थान में आग लगना सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा, प्रशासनिक सतर्कता और तकनीकी प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है।

स्वास्थ्य संस्थान वह जगह है जहां लोग जीवन बचाने आते हैं, लेकिन यदि वहीं जीवन खतरे में पड़ जाए तो फिर सिस्टम-सरकार को दोष दिया जाना तो वाजिब सी बात है। हर बार जांच बैठती है, रिपोर्ट बनती है, जिम्मेदारों को नोटिस दिए जाते हैं, लेकिन स्थायी सुधार नहीं दिखता। एसएमएस में यदि फिर आग लगी है तो यह साफ संकेत है कि पिछली चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। आग की घटनाओं को महज तकनीकी खराबी कहकर टाल देना समस्या का समाधान नहीं है। यहां बार-बार आग की घटनाओं से मरीजों और उनके परिजनों में डर का माहौल है। अस्पताल प्रबंधन ने हर आग की घटना के बाद एक जांच कमेटी तो गठित कर दी, लेकिन उनकी रिपोर्टों पर गंभीर अमल नहीं हो पाया। कमेटियों की रिपोर्ट्स कभी सार्वजनिक नहीं की गईं, ना ही सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए। इससे सवाल उठता है कि आखिर इन जांच कमेटियों का महत्व क्या रह गया है.

अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर, फैकल्टी रूम, स्टोर, डॉरमेट्री, ओपीडी, कैंटीन, आईसीयू और जनरल वार्ड सहित कई महत्वपूर्ण हिस्सों में बार-बार आग लगी। कई बार तो मरीजों को तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा, जिससे अस्पताल प्रशासन की अफरा-तफरी सामने आई।अस्पताल में बार-बार आग लगने की घटनाएं सिर्फ हादसे नहीं, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर खामियों का प्रतीक हैं। यह अस्पताल न केवल जयपुर, बल्कि पूरे प्रदेश के मरीजों के लिए जीवनरेखा है। ऐसे संस्थान में आग लगना सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा, प्रशासनिक सतर्कता और तकनीकी प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है। सवाल यही है क्या हम हर हादसे के बाद सिर्फ जांच रिपोर्ट का इंतजार करेंगे, या वास्तव में सुधार की दिशा में ठोस कार्रवाई करेंगे? हर बार जांच बैठती है, रिपोर्ट बनती है, जिम्मेदारों को नोटिस दिए जाते हैं, लेकिन स्थायी सुधार नहीं दिखता। आग की घटनाओं को महज “तकनीकी खराबी” कहकर टाल देना समस्या का समाधान नहीं है। यह समय है कि सरकार और अस्पताल प्रशासन ठोस कदम उठाएं।

Prateek Chauvey
Prateek Chauveyhttps://jagoindiajago.news/
माननीय प्रतीक चौबे जी(Prateek Chauvey ) द्वारा प्रस्तुत यह मंच जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा भरने का प्रयास है। यहाँ दी गई जानकारी आपकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा में सहायक होगी, आपको नई सोच के साथ बदलाव और सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करेगी।
RELATED ARTICLES
- Advertisment -
Google search engine

Most Popular