Sunday, April 19, 2026
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US Tomahawk Missiles: ईरान पर अमेरिका ने दागीं 850 टॉमहॉक मिसाइलें, लंबा युद्ध हुआ तो स्टॉक खत्म होने का खतरा

ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका ने बड़े पैमाने पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार चार हफ्तों में अमेरिका 850 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें दाग चुका है, जिससे उसके सैन्य भंडार पर दबाव बढ़ने लगा है।

US Tomahawk Missiles: ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका ने बड़े पैमाने पर टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार चार हफ्तों में अमेरिका 850 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें दाग चुका है, जिससे उसके सैन्य भंडार पर दबाव बढ़ने लगा है।

चार हफ्तों में 850 से ज्यादा मिसाइलें दागीं

वॉशिंगटन। जानकारी के मुताबिक अमेरिकी नौसेना के पास करीब 4,000 टॉमहॉक मिसाइलें थीं। ऐसे में मौजूदा संघर्ष के दौरान इनका लगभग एक चौथाई हिस्सा इस्तेमाल हो चुका है। इससे रक्षा विभाग के भीतर चिंता बढ़ गई है कि अगर युद्ध लंबा चला तो स्टॉक तेजी से खत्म हो सकता है।

क्या है टॉमहॉक मिसाइल की खासियत

टॉमहॉक अमेरिका की लंबी दूरी की क्रूज मिसाइल है, जो करीब 1,000 मील (1600 किमी) तक उड़कर सटीक निशाना साध सकती है। इसके एडवांस वर्जन की रेंज 2500 किमी तक बताई जाती है। इस मिसाइल को युद्धपोतों और पनडुब्बियों से भी दागा जा सकता है, जिससे बिना सीमा में घुसे दुश्मन पर हमला संभव होता है।

बनाने में लगते हैं 2 साल

एक टॉमहॉक मिसाइल को तैयार करने में करीब 2 साल का समय लगता है। मौजूदा उत्पादन क्षमता के अनुसार अमेरिका एक साल में लगभग 600 मिसाइलें ही बना पाता है। तेजी से हो रहे इस्तेमाल के कारण इनकी सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है और कमी को पूरा करने में कई साल लग सकते हैं।

कीमत भी है बेहद ज्यादा

एक टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब 36 लाख डॉलर (लगभग 34 करोड़ रुपये) बताई जाती है। ऐसे में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का आर्थिक असर भी पड़ सकता है।

जापान के साथ डील अटकी

टॉमहॉक मिसाइल उत्पादन बढ़ाने के लिए अमेरिका और जापान के बीच संयुक्त निर्माण की योजना पर चर्चा हुई थी, लेकिन तकनीक साझा करने को लेकर विवाद के कारण यह योजना अटक गई।

चीन से बढ़ती चुनौती

रिपोर्ट्स के अनुसार चीन तेजी से सैन्य क्षमता बढ़ा रहा है और हथियार निर्माण में अमेरिका से कई गुना आगे निकल रहा है। ऐसे में अमेरिका के लिए यह स्थिति रणनीतिक चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध लंबा चला तो अमेरिका को अपने सैन्य भंडार और सहयोगी देशों के साथ रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।

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