Monday, July 13, 2026
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अमेरिका बनेगा होर्मुज का गार्जियन, ट्रंप बोले- वैश्विक व्यापार सुरक्षित रखेंगे, लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी होगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा करने को तैयार है, लेकिन इसके बदले उचित भुगतान मिलना चाहिए। उन्होंने ईरान पर समझौता तोड़ने और क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने का आरोप लगाया।

Middle East Tensions : नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बड़ा बयान दिया है। फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है, लेकिन इसके बदले उसे भुगतान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और अमेरिका लंबे समय से इसकी सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता रहा है।

ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले एक समझौता हुआ था, लेकिन ईरान ने उसे तोड़ दिया। उन्होंने ईरान को “बहुत बुरे लोग” बताते हुए आरोप लगाया कि उसके रवैये ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाई है। ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, तो इसके लिए उचित आर्थिक भुगतान मिलना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है।

होर्मुज सुरक्षा के बदले भुगतान चाहता है अमेरिका : ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का “गार्जियन” (संरक्षक) बनने के लिए तैयार है, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और वैश्विक तेल आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रह सके। ट्रंप का कहना है कि यदि अमेरिका इस महत्वपूर्ण जलमार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है, तो इसके बदले उसे उचित आर्थिक भुगतान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की आपूर्ति होती है। ऐसे में इसकी सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

ट्रंप ने ईरान पर निशाना साधते हुए दावा किया कि एक दिन पहले ईरान के प्रतिनिधियों के साथ करीब 11 घंटे तक लंबी बैठक हुई थी, जिसमें लगभग सभी मुद्दों पर सहमति बन गई थी। हालांकि, बैठक समाप्त होने के बाद ईरानी पक्ष ने दोबारा संपर्क कर समझौते में कुछ बदलाव की मांग रख दी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि ईरान पिछले 47 वर्षों से इसी तरह वार्ता को टालता रहा है और यह विवाद काफी पहले सुलझ जाना चाहिए था। ट्रंप के इन बयानों को अमेरिका-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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Mukesh Kumar
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