Saturday, May 16, 2026
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Supreme Court का बड़ा फैसला, पहली बार दी इच्छामृत्यु की परमिशन, 13 साल से कोमा में हैं हरीश राणा

Supreme Court Euthanasia Ruling: सुप्रीम कोर्ट ने 13 साल से कोमा में पड़े 32 वर्षीय हरीश राणा को लाइफ-सपोर्ट हटाकर निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की परमिशन दे दी। राणा 2013 में इमारत से गिरने के बाद सिर में गंभीर चोट के कारण कोमा में हैं।

Supreme Court Euthanasia Ruling: सुप्रीम कोर्ट ने 32 साल के हरीश राणा को लाइफ-सपोर्ट सिस्टम हटाकर निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive euthanasia) की बुधवार को परमिशन दे दी है. राणा 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिरने के कारण सिर में चोट लगने से घायल हो गए थे और वह एक दशक से अधिक समय से कोमा में है.

क्या होती है निष्क्रिय इच्छामृत्यु

निष्क्रिय इच्छामृत्यु का अर्थ है कि किसी गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को जीवित रखने वाली चिकित्सा सहायता को रोकने या जीवन रक्षक प्रणाली को हटाने की अनुमति देना ताकि उसकी स्वाभाविक रूप से मौत हो सके.

पेलिएटिव केयर यूनिट में भर्ती करने का निर्देश

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को राणा को उपशामक देखभाल इकाई (Palliative Care Unit) में भर्ती करने का निर्देश दिया ताकि चिकित्सकीय उपचार बंद किया जा सके. पीठ ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उपचार को एक सुनियोजित तरीके से बंद किया जाए ताकि गरिमा बनी रहे.

प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड ने रिपोर्ट में क्या कहा ?

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले हरीश राणा के माता-पिता से मिलने की इच्छा जताई थी. उसने दिल्ली स्थित एम्स के चिकित्सकों के द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड द्वारा दाखिल की गई राणा की चिकित्सा संबंधी रिपोर्ट का अवलोकन किया था और कहा था कि यह रिपोर्ट दुखद है. प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड ने मरीज की स्थिति की जांच करने के बाद कहा था कि उसके ठीक होने की संभावना नगण्य है. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 11 दिसंबर को कहा था कि प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार यह व्यक्ति बेहद दयनीय स्थिति में है.

प्राथमिक, द्वितीय चिकित्सा बोर्ड गठन अनिवार्य

बता दें कि उच्चतम न्यायालय द्वारा 2023 में जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, कोमा की स्थिति वाले मरीज की कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली हटाने को लेकर विशेषज्ञों की राय लेने के लिए एक प्राथमिक और एक द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड का गठन करना अनिवार्य है.

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Premanshu Chaturvedi
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