Wednesday, July 8, 2026
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Sourav Ganguly Birthday: 54 साल के हुए ‘दादा’, जानें रिकॉर्ड से विवाद तक का सफर

भारतीय क्रिकेट के ‘दादा’ सौरव गांगुली 54 साल के हुए। जन्मदिन के खास मौके पर जानिए उनके शानदार क्रिकेट सफर, कप्तानी की उपलब्धियों, यादगार रिकॉर्ड्स और विवादों से जुड़े पहलुओं के बारे में

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली कप्तानों में शुमार Sourav Ganguly आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। 8 जुलाई 1972 को कोलकाता में जन्मे गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को सिर्फ रन और रिकॉर्ड नहीं दिए, बल्कि टीम को एक नई सोच और आत्मविश्वास भी दिया।‘दादा’ के नाम से मशहूर गांगुली को भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन कप्तानों में गिना जाता है, जिन्होंने मुश्किल दौर में टीम की कमान संभाली और उसे विदेशी धरती पर जीतने का भरोसा दिलाया। उनकी आक्रामक कप्तानी, शानदार बल्लेबाजी और युवा खिलाड़ियों पर भरोसे ने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई।

सचिन समेत क्रिकेट जगत ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं


सौरव गांगुली के जन्मदिन पर क्रिकेट जगत से उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। उनके लंबे समय के साथी और पूर्व भारतीय बल्लेबाज Sachin Tendulkar ने भी उन्हें खास अंदाज में याद किया। सचिन और गांगुली की जोड़ी वनडे क्रिकेट की सबसे सफल ओपनिंग जोड़ियों में शामिल रही है।भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड Board of Control for Cricket in India (BCCI) ने भी पूर्व कप्तान को बधाई देते हुए भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को याद किया। क्रिकेट फैंस भी सोशल मीडिया पर ‘दादा’ को जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रहे हैं।

लॉर्ड्स में शतक से शुरू हुई ऐतिहासिक कहानी


गांगुली ने 1992 में भारत के लिए वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया था, लेकिन उन्हें असली पहचान 1996 में मिली। इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए अपने पहले टेस्ट मैच में उन्होंने 131 रनों की शानदार पारी खेलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धमाकेदार शुरुआत की। डेब्यू टेस्ट में शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों में शामिल गांगुली ने इसके बाद लंबे समय तक भारतीय बल्लेबाजी को मजबूती दी। ऑफ साइड पर उनके शानदार खेल के कारण उन्हें ‘गॉड ऑफ ऑफ साइड’ भी कहा गया। वनडे क्रिकेट में गांगुली और सचिन तेंदुलकर की ओपनिंग जोड़ी ने कई यादगार पारियां खेलीं। दोनों ने मिलकर भारत को कई बड़े मुकाबलों में शानदार शुरुआत दिलाई। गांगुली की टाइमिंग, ऑफ ड्राइव और स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी उनकी पहचान बनी

नेटवेस्ट ट्रॉफी जीत ने बदला भारतीय क्रिकेट का आत्मविश्वास


13 जुलाई 2002 को इंग्लैंड में नेटवेस्ट ट्रॉफी जीत भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार पलों में शामिल है। लॉर्ड्स में मिली इस जीत के बाद गांगुली का जर्सी उतारकर जश्न मनाना आज भी क्रिकेट फैंस को याद है। यह सिर्फ एक ट्रॉफी जीत नहीं थी, बल्कि विदेशी मैदानों पर भारत के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक थी। सौरव गांगुली का अंतरराष्ट्रीय करियर आंकड़ों के लिहाज से भी बेहद शानदार रहा।

113 टेस्ट मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
311 वनडे मुकाबले खेले।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 18,000 से ज्यादा रन बनाए।
कुल 38 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाए।
टेस्ट क्रिकेट में 7,000 से ज्यादा रन बनाए।
वनडे क्रिकेट में 11,000 से ज्यादा रन पूरे किए।
टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 16 शतक और वनडे में 22 शतक दर्ज हैं।

1999 वर्ल्ड कप की 183 रन की पारी आज भी खास


1999 वनडे विश्व कप में श्रीलंका के खिलाफ सौरव गांगुली ने 183 रनों की यादगार पारी खेली थी। यह विश्व कप इतिहास में किसी भारतीय बल्लेबाज की सबसे बड़ी पारियों में शामिल है। वह वनडे क्रिकेट में 10,000 रन पूरे करने वाले शुरुआती बल्लेबाजों में भी शामिल रहे। चैंपियंस ट्रॉफी में भी दिखा ‘दादा’ का जलवा…आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में भी गांगुली का प्रदर्शन शानदार रहा। वह इस टूर्नामेंट में तीन शतक लगाने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं। 2000 चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल में उनकी 117 रनों की पारी आज भी टूर्नामेंट के फाइनल की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। टेस्ट कप्तान के रूप में गांगुली ने 49 मैचों में भारत का नेतृत्व किया, जिसमें टीम ने 21 मुकाबले जीते। विदेशी मैदानों पर जीत हासिल करने की उनकी क्षमता ने उन्हें भारत के सबसे सफल कप्तानों में शामिल किया।वनडे में उन्होंने 146 मैचों में कप्तानी की और भारत को 76 जीत दिलाईं। उनकी कप्तानी में भारत 2003 वनडे विश्व कप के फाइनल तक पहुंचा था।

सम्मान और पुरस्कार


भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान के लिए गांगुली को कई बड़े सम्मान मिले।

अर्जुन पुरस्कार (1997) – खेल में उत्कृष्ट योगदान के लिए।
पद्म श्री (2004) – भारत सरकार का प्रतिष्ठित सम्मान।
बंग विभूषण (2013) – पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सम्मान।

क्यों हमेशा याद किए जाएंगे ‘दादा’?


गांगुली का करियर उपलब्धियों के साथ-साथ विवादों से भी जुड़ा रहा। 2005 में कोच Greg Chappell के साथ मतभेदों के बाद उन्हें टीम से बाहर होना पड़ा। यह दौर भारतीय क्रिकेट में काफी चर्चा में रहा।हालांकि गांगुली ने वापसी की और अपने प्रदर्शन से आलोचकों को जवाब दिया। सौरव गांगुली की विरासत सिर्फ उनके बनाए रनों तक सीमित नहीं है। उन्होंने भारतीय क्रिकेटरों को विदेशी टीमों के सामने आंख से आंख मिलाकर खेलने का विश्वास दिया। एक बल्लेबाज, कप्तान और लीडर के रूप में गांगुली ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी। यही वजह है कि आज भी करोड़ों क्रिकेट फैंस उन्हें प्यार से ‘दादा’ कहकर याद करते हैं।

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