Friday, July 17, 2026
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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की चेतावनी, पश्चिम एशिया संकट और कमजोर मानसून से भारत की आर्थिक रफ्तार पर मंडरा रहा बड़ा खतरा

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और कमजोर मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम हैं। इसके बावजूद मजबूत आर्थिक आधार के चलते आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में 6.6% जीडीपी वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है। महंगाई और रुपये पर भी सतर्क नजर रखी जाएगी।

India GDP Growth : नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा (RBI Governor Sanjay Malhotra) ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कमजोर मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम हैं। इसके बावजूद मजबूत आर्थिक आधार के कारण देश की विकास दर मजबूत बनी हुई है। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए 6.6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है।

आरबीआई ने 6.6% वृद्धि अनुमान बरकरार रखा

मल्होत्रा ने ‘डीडी न्यूज’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि पिछले वित्त वर्ष में देश की वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही जबकि चालू वित्त वर्ष के लिए आरबीआई ने विभिन्न चुनौतियों के बावजूद 6.6 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है। उन्होंने कहा, मौद्रिक और राजकोषीय नीतियां मजबूत हैं, जिसके कारण हमारी वृद्धि दर उच्च बनी हुई है।

मुद्रास्फीति पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है। मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने से जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई जबकि खाद्य मुद्रास्फीति 5.32 प्रतिशत रही। आरबीआई गवर्नर ने मानसून को एक अन्य जोखिम कारक बताते हुए कहा कि देश की एक बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है और इसका सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में करीब 17 प्रतिशत योगदान है, इसलिए मानसून की स्थिति पर नजर बनाए रखना होगा।

कमजोर मानसून अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम

रुपये में गिरावट पर उन्होंने कहा कि मजबूत डॉलर और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद अन्य देशों की तुलना में भारतीय मुद्रा का प्रदर्शन स्थिर रहा है। उन्होंने कहा, ‘पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद डॉलर मजबूत हुआ है। कई देशों की मुद्राएं कमजोर पड़ी हैं। अगर हम वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारतीय रुपये की स्थिति सामान्य मानी जा सकती है।’ मल्होत्र ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर कहा कि पिछले वर्ष सकल एफडीआई लगभग 95 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर रहा, जबकि चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में शुद्ध एफडीआई करीब सात अरब डॉलर रहा है।

मल्होत्रा ने कहा कि आरबीआई मुद्रास्फीति पर नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए वृद्धि को भी समर्थन देता रहेगा। उन्होंने कहा, कम और स्थिर महंगाई टिकाऊ वृद्धि की आधारशिला है। ऋण वृद्धि के बारे में उन्होंने कहा कि जून में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर करीब 18 प्रतिशत रही, जो मई के 17.5 प्रतिशत से अधिक है।कृत्रिम मेधा (एआई) के उपयोग पर उन्होंने कहा कि आरबीआई ने बैंकों को ग्राहक सेवा बेहतर करने, लागत घटाने और निर्णय क्षमता बढ़ाने के लिए इसका उपयोग बढ़ाने की सलाह दी। साथ ही साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता पर सतर्क रहने को कहा है। मल्होत्रा ने हफ्ते की शुरुआत में सार्वजनिक एवं चुनिंदा निजी बैंकों के प्रबंध निदेशकों एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के साथ बैठक में भी एआई जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने के लिए कहा था।

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Mukesh Kumar
Mukesh Kumarhttps://jagoindiajago.news/
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