Ebola Cases In Rajasthan: जयपुर। राजस्थान में इबोला वायरस का पहला संदिग्ध केस सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है. युगांडा से राजस्थान घूमने आई एक विदेशी महिला में इबोला जैसे लक्षण पाए जाने के बाद उसे जयपुर के आरयूएचएस (RUHS) अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है.
सैंपल जांच के लिए भेजे पुणे
जनस्वास्थ्य निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि महिला के नमूने जांच के लिए पुणे स्थित विशेष प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं. रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला वास्तव में इबोला वायरस से संक्रमित है या नहीं. फिलहाल महिला को चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है.
क्या है इबोला वायरस?
इबोला वायरस एक गंभीर और जानलेवा संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के रक्त, शारीरिक तरल पदार्थों या संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से फैलती है. यह बीमारी पहली बार वर्ष 1976 में अफ्रीका में सामने आई थी और समय-समय पर इसके प्रकोप देखे गए हैं. गंभीर मामलों में यह बीमारी जानलेवा भी साबित हो सकती है.
इबोला के प्रमुख लक्षण
इबोला वायरस के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 2 से 21 दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। इसके प्रमुख लक्षण तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी और थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी और दस्त, पेट दर्द, गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव हो सकता है.
इबोला का इलाज
फिलहाल इबोला का कोई पूर्ण और निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है. हालांकि समय पर पहचान और उचित चिकित्सा देखभाल से मरीज के बचने की संभावना बढ़ जाती है. उपचार में मुख्य रूप से: शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना, ऑक्सीजन सपोर्ट देना, ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखना, संक्रमण से होने वाली जटिलताओं का इलाज करना शामिल है. कुछ देशों में इबोला के लिए वैक्सीन और एंटीबॉडी आधारित उपचार का भी उपयोग किया जा रहा है.
बचाव के उपाय
संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से बचें.
हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं.
संक्रमित व्यक्ति के रक्त या शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में न आएं.
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें.
प्रभावित क्षेत्रों की यात्रा करने पर स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं.
किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें.



