जयपुर। राजस्थान की आशा सहयोगिनियों के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने आशा सहयोगिनियों के मानदेय में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी को वित्तीय मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब आशा सहयोगिनियों को हर महीने 4,959 रुपये के स्थान पर 5,455 रुपये मिलेंगे। राज्य सरकार के इस निर्णय से प्रदेश की हजारों महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। मानदेय बढ़ाने का फैसला बजट में की गई घोषणा और रक्षाबंधन के अवसर पर किए गए वादे को पूरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
आशा सहयोगिनियों को अब हर महीने मिलेंगे 496 रुपये ज्यादा
राजस्थान सरकार की ओर से मानदेय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी मिलने के बाद आशा सहयोगिनियों की मासिक आय में इजाफा होगा। पहले आशा सहयोगिनियों को हर महीने 4,959 रुपये मानदेय मिलता था। अब यह राशि बढ़कर 5,455 रुपये हो जाएगी। यानी प्रत्येक आशा सहयोगिनी को हर महीने 496 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। इस हिसाब से एक साल में 5,952 रुपये का अतिरिक्त आर्थिक लाभ होगा, बशर्ते पूरे साल बढ़ी हुई दर लागू रहे।
बजट घोषणा को लागू करने की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बजट घोषणा के साथ ही रक्षाबंधन के अवसर पर आशा सहयोगिनियों के मानदेय में बढ़ोतरी का वादा किया था। अब सरकार ने इस वृद्धि को वित्तीय मंजूरी देकर घोषणा को आगे बढ़ाया है। मानदेय में यह इजाफा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी महिला कार्यकर्ताओं के आर्थिक सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गांवों से शहरों तक स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका
राजस्थान में आशा सहयोगिनियां स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ग्रामीण इलाकों, कस्बों और शहरी बस्तियों में वे स्वास्थ्य विभाग तथा स्थानीय समुदाय के बीच संपर्क का काम करती हैं।
इनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल हैं:
- गर्भवती महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रोत्साहित करना।
- संस्थागत प्रसव के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
- नवजात शिशुओं और बच्चों के टीकाकरण में सहयोग करना।
- मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाना।
- पोषण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में भाग लेना।
- सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और अभियानों को जमीनी स्तर पर लागू करने में सहयोग करना।
इन कार्यों के माध्यम से आशा सहयोगिनियां स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में योगदान देती हैं।



