नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग से देश के बाहर अपनी पहुंच और मजबूत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA किए हैं, जिससे भारतीय उत्पादों के लिए विदेशी बाजारों के रास्ते आसान हुए हैं। ऑटो कंपनियों को इन अवसरों का इस्तेमाल कर निर्यात बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धा मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने यह बात ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े एक प्रमुख कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भारत का वाहन उद्योग ऐसे दौर में है, जहां तकनीक, ऊर्जा और परिवहन व्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे में कंपनियों को बदलती जरूरतों के मुताबिक खुद को तैयार करना होगा।
मोदी ने खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वाहनों की संभावनाओं पर जोर दिया। उनका कहना है कि व्यापार समझौतों के कारण भारतीय कंपनियों को कई देशों में कारोबार बढ़ाने के नए अवसर मिल रहे हैं। ऐसे में केवल घरेलू बिक्री पर निर्भर रहने के बजाय कंपनियों को निर्यात को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहिए।
भारतीय ऑटो उद्योग के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में इस क्षेत्र ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं। देश में यात्री वाहनों से लेकर दोपहिया और अन्य श्रेणियों की बिक्री में मजबूती देखने को मिली है। इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में भी तेजी आई है, जिससे ऑटो सेक्टर में नई तकनीकों के लिए बाजार तेजी से तैयार हो रहा है।
निर्यात के आंकड़े भी भारतीय वाहन उद्योग की बढ़ती क्षमता की तस्वीर पेश करते हैं। यात्री वाहनों और दोपहिया वाहनों की विदेशों में मांग बढ़ी है। इससे भारत के लिए ग्लोबल ऑटो मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
प्रधानमंत्री ने ऑटो उद्योग के सामने आने वाली भविष्य की चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वैकल्पिक ऊर्जा, बेहतर ईंधन दक्षता और अत्याधुनिक तकनीक पर निवेश बढ़ाने की जरूरत बताई। उनका जोर ऐसी गाड़ियों के निर्माण पर है जो भारतीय बाजार के साथ-साथ दुनिया के अलग-अलग देशों की जरूरतों को भी पूरा कर सकें।
सरकार की नीतियों का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन जैसी योजनाओं और कारोबार को आसान बनाने वाले सुधारों से उद्योग को मदद मिली है।
प्रधानमंत्री ने साफ संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में भारत के ऑटो सेक्टर के लिए सिर्फ देश में बिक्री बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। भारतीय कंपनियों को गुणवत्ता, तकनीक और कीमत के मामले में वैश्विक कंपनियों को चुनौती देते हुए विदेशी बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी होगी।



