देहरादून। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने राष्ट्रीय हितों से ऊपर अपने राजनीतिक एजेंडे को रखा, जिसके कारण महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने वाला महत्वपूर्ण विधेयक आगे नहीं बढ़ सका।
देहरादून में आयोजित एक प्रेस वार्ता में धामी ने कहा कि प्रस्तावित संविधान संशोधन का उद्देश्य 2029 से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना था। इसके साथ ही लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का भी प्रावधान शामिल था। हालांकि, यह विधेयक आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर पाया, जिससे इस पर राजनीतिक टकराव और बढ़ गया है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के साथ-साथ समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम पर आरोप लगाया कि उन्होंने जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया और महिलाओं से जुड़े एक बड़े फैसले को रोकने के लिए निराधार तर्क पेश किए। उनके अनुसार, यह कदम देश की “आधी आबादी” के अधिकारों के साथ अन्याय के समान है।
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धामी ने कहा कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी संतुलित प्रतिनिधित्व के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष की नकारात्मक राजनीति ने इस दिशा में बाधा उत्पन्न की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दलों ने मुद्दे से ध्यान हटाकर अनावश्यक विषयों को उठाया, जिससे सर्वसम्मति बनने में कठिनाई हुई। विशेष रूप से धर्म आधारित आरक्षण की मांग पर उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के पिछले रुख पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर उसका दृष्टिकोण विरोधाभासी रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि परिवार-आधारित राजनीति करने वाले दल आम पृष्ठभूमि की महिलाओं को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते।
इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए धामी ने कहा कि परिसीमन को लेकर फैलाई जा रही आशंकाएं निराधार हैं और किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व में कमी नहीं आएगी।
धामी ने स्पष्ट किया कि भले ही यह विधेयक पारित नहीं हो सका, लेकिन राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने समान नागरिक संहिता जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।



