जयपुर। महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक को संसद में मंजूरी न मिल पाने के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें महिलाओं के अधिकारों के प्रति असंवेदनशील बताया।
जयपुर स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में शर्मा ने कहा कि विपक्ष ने एक महत्वपूर्ण अवसर गंवा दिया, जब देश में महिलाओं को विधायी संस्थाओं में अधिक भागीदारी देने की दिशा में ठोस कदम उठाया जा सकता था। उनके अनुसार, इस पहल के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया था, जिससे आने वाले वर्षों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव देखने को मिलता।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सकारात्मक सहयोग देने के बजाय राजनीतिक लाभ को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक पारित हो जाता, तो 2029 के आम चुनावों से ही महिलाओं को व्यापक स्तर पर प्रतिनिधित्व मिलने लगता। शर्मा ने यह भी कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने के लिए ठोस पहल नहीं की।
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उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव के साथ अन्य संबंधित विधायी पहलें भी पेश की थीं, जिनका उद्देश्य प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित बनाना था। शर्मा के अनुसार, इन प्रस्तावों पर विपक्ष द्वारा उठाए गए कई सवालों का जवाब दिया गया, लेकिन फिर भी समर्थन नहीं मिला। परिसीमन को लेकर फैली आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ दलों ने विशेष रूप से दक्षिण भारत के संदर्भ में भ्रम फैलाया, जबकि यह प्रक्रिया सभी राज्यों के लिए समान रूप से लागू होती है और प्रतिनिधित्व को बेहतर बनाती है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष को परिवारवादी राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि वे महिलाओं के सशक्तिकरण की बात तो करते हैं, लेकिन वास्तविक निर्णय के समय पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं से जुड़ा था और इसका पारित न होना निराशाजनक है।
इस दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी विपक्ष के रुख की आलोचना करते हुए विधेयक के समर्थन की आवश्यकता पर जोर दिया।



