Wednesday, July 15, 2026
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न हाथों से खींचना, न रस्सियों की जरूरत…जयपुर में रिमोट से चलेगा रथ, राजस्थान में निकलेगी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा

राजस्थान में भगवान जगन्नाथ की रथयात्राओं की तैयारियां पूरी हो गई हैं। 16 जुलाई को तीन अलग-अलग रथयात्राएं निकलेंगी, जिनमें 250 साल पुरानी परंपरा से लेकर आधुनिक हाइड्रोलिक रथ तक देखने को मिलेगा। उदयपुर में भगवान 95 किलो के चांदी के रथ पर नगर भ्रमण करेंगे, जबकि अलवर में 22 जुलाई को 196 साल पुराने इंद्र विमान पर शाही यात्रा निकलेगी।

जयपुर(प्राज्ञ पांडे)। राजस्थान भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्राओं के रंग में रंगने के लिए तैयार है। 16 जुलाई को जयपुर, उदयपुर और अलवर में श्रद्धा, परंपरा और उत्सव का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि जयपुर में एक ही दिन में भगवान जगन्नाथ की तीन अलग-अलग रथयात्राएं निकलेंगी, जिनकी अपनी अलग पहचान और परंपरा है। वहीं उदयपुर में भगवान जगन्नाथ 95 किलो के चांदी के रथ पर नगर भ्रमण करेंगे, जबकि अलवर में 22 जुलाई को 196 साल पुराने इंद्र विमान पर विराजमान होकर भगवान जगन्नाथ की शाही यात्रा निकलेगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन की तैयारी भी कर ली है।

जयपुर की शुरुआत सुबह 6 बजे गोविंददेवजी मंदिर की करीब 250 साल पुरानी पारंपरिक रथयात्रा से होगी। भगवान जगन्नाथ को छोटे चांदी के रथ में विराजमान कर मंदिर परिसर की चार परिक्रमा कराई जाएगी। इसके बाद मंदिर की टीम भरतपुर जिले के कामां पहुंचेगी, जहां शाम को काष्ठ से निर्मित भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के साथ पारंपरिक शोभायात्रा निकलेगी। इसी दिन शाम 5 बजे श्री जगन्नाथ सेवक समिति की ओर से गोविंददेवजी मंदिर से दूसरी भव्य रथयात्रा निकलेगी। इसमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा दिव्य रथ पर सवार होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। इस आयोजन के लिए समिति ने करीब 30 लाख रुपए का बजट रखा है। इसके आधे घंटे बाद गुप्त वृंदावन धाम की तीसरी रथयात्रा रवाना होगी, जिसमें भगवान विशेष रिमोट संचालित हाइड्रोलिक रथ पर विराजमान होंगे। इस रथ की खासियत यह है कि बिजली के तारों वाले रास्तों पर इसकी ऊंचाई जरूरत के मुताबिक कम या ज्यादा की जा सकती है।

जयपुर में रथयात्रा सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े उत्सव कई दिनों तक चलते हैं। स्नान पूर्णिमा के साथ शुरू हुआ महोत्सव 27 जुलाई तक जारी रहेगा। इस दौरान पुरी की परंपरा के अनुसार विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे। नौ दिवसीय कथा में गोवर्धन मठ की शंकराचार्य परंपरा से जुड़े संत शिवमणि त्रिपाठी महाराज भगवान जगन्नाथ की महिमा, रथयात्रा के आध्यात्मिक महत्व और सनातन संस्कृति से जुड़े प्रसंगों पर श्रद्धालुओं को संबोधित करेंगे।

उदयपुर में भी रथयात्रा को लेकर खास उत्साह है। 16 जुलाई को दोपहर 3 बजे भगवान जगन्नाथ स्वामी माता लक्ष्मी और दानीराय जी के साथ 95 किलो के चांदी के रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। पूरे रथयात्रा मार्ग और श्रद्धालुओं के घरों की छतों पर 11 हजार ध्वजा-पताकाएं लगाई जाएंगी। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित झांकियां, पांच बैंड, भजन मंडलियां, ऊंट-घोड़े और शाही लवाजमा यात्रा की रौनक बढ़ाएंगे। बड़ी संख्या में महिलाएं सिर पर कलश रखकर मंगलगीत गाती हुई चलेंगी, जबकि श्रद्धालु भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच रथ के साथ आगे बढ़ेंगे। यात्रा में शामिल होने वाले करीब 10 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी की भी व्यवस्था की गई है।

अलवर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 22 जुलाई को सुभाष चौक स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से निकलेगी। इस बार भगवान 196 साल पुराने इंद्र विमान पर विराजमान होकर विवाह यात्रा के लिए निकलेंगे और श्रद्धालु बाराती बनकर इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनेंगे। यात्रा में हरियाणा का प्रसिद्ध बमरसिया नृत्य, शंखवादक, घड़ियाल पार्टी, ऊंट-घोड़े, बैंड, शहनाई वादन और आकर्षक धार्मिक झांकियां शामिल होंगी। भगवान की विशेष पोशाक के लिए इस बार भी दुबई से कपड़ा भेजा गया है, जबकि विदेश से आए इत्र से श्रृंगार किया जाएगा। आस्था, संस्कृति और परंपरा का यह संगम एक बार फिर राजस्थान की सड़कों पर भगवान जगन्नाथ के जयघोष के साथ दिखाई देगा।

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