Iran-Israel Conflict : यरुशलम। एक नए वीडियो फुटेज से यह आशंका मजबूत हुई है कि अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में एक परिसर पर अपनी टॉमहॉक मिसाइल से हमला किया था। यह परिसर उस स्कूल के पास स्थित है, जहां पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की शुरुआत में हुए विस्फोट में 165 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। जांचकर्ताओं का कहना है कि 28 फरवरी को हुआ यह हमला ईरान के मिनाब शहर में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के एक ठिकाने के पास स्थित स्कूल के निकट हुआ था। यह क्षेत्र होरमोजगन प्रांत में आता है।
ईरान के मिनाब में मिसाइल अटैक का खुलासा
इस हमले का एक नया वीडियो सामने आया है जिसकी जांच ‘बेलिंगकैट’ नामक जांच समूह ने की। इस वीडियो में एक मिसाइल को इमारत से टकराते और आसमान में काला धुआं उठते हुए देखा गया है। समाचार एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ ने इस वीडियो की भौगोलिक स्थिति की जांच में पाया कि इसे स्कूल के पास के ही इलाके से रिकॉर्ड किया गया था, जहां पहले से ही धुआं उठ रहा था। बेलिंगकैट समूह के शोधकर्ता ट्रेवर बॉल ने हमले में इस्तेमाल हथियार की पहचान टॉमहॉक क्रूज मिसाइल के रूप में की है,जो केवल अमेरिका के ही पास मौजूद है।

‘यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड’ ने इस युद्ध में टॉमहॉक मिसाइलों के इस्तेमाल की पुष्टि की है और 28 फरवरी को यूएसएस स्प्रुएन्स द्वारा मिसाइल दागे जाने की तस्वीर भी जारी की थी। यह जहाज यूएसएस अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत समूह का हिस्सा है, जो हमले के इलाके की मारक दूरी में था। बेलिंगकैट ने कहा कि यह फुटेज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे का खंडन करता हुआ लग रहा है, जिसमें उन्होंने घातक विस्फोट के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था।
ट्रंप ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरान के पास भी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल हो सकती है। यह मिसाइल अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियोन बनाती है और जापान व ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों को बेची जाती है। ईरान के पास इसके होने का कोई प्रमाण नहीं है। ट्रंप ने कहा, “यह मिसाइल कई देशों को बेची जाती है और इस्तेमाल की जाती है। ईरान के पास भी कुछ टॉमहॉक हो सकते हैं।” इस बीच, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका इस घटना की जांच कर रहा है।
अमेरिकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसी घटना में अमेरिकी सेना की संभावित भूमिका सामने आती है तो उसकी समीक्षा शुरू की जाती है। इसी के तहत इस हमले का भी आकलन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल की लोकेशन भी इस आशंका को बल देती है, क्योंकि वह रिवोल्यूशनरी गार्ड के ठिकाने और नौसैनिक इकाई की बैरक के पास स्थित है। अमेरिका पहले ही इस प्रांत में नौसैनिक लक्ष्यों पर हमले की बात स्वीकार कर चुका है।




