जयपुर। दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस और विपक्ष की महारैली को भाजपा ने जनता द्वारा बार-बार नकारे गए नेताओं का राजनीतिक प्रदर्शन करार दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने कांग्रेस पर लोकतंत्र बचाने के नाम पर राजनीतिक नौटंकी करने का आरोप लगाया। दोनों नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा का दावा करने से पहले कांग्रेस को अपने इतिहास से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए।
मदन राठौड़ ने राहुल गांधी की रैली पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर अराजकता और अस्थिरता का माहौल बनाना उचित नहीं है। उन्होंने 1984 के सिख नरसंहार का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना और जवाबदेही दिखानी चाहिए। राठौड़ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के ‘जब बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती कांपती है’ वाले बयान का उल्लेख करते हुए कांग्रेस से अपने अतीत पर जवाब देने की मांग की।
वहीं, डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे, जबकि राहुल गांधी 2024 के लोकसभा चुनाव के आधार पर नेता प्रतिपक्ष हैं। चतुर्वेदी ने सवाल किया कि यदि राहुल गांधी 2024 के चुनाव को अवैध बताते हैं, तो क्या उनकी और कांग्रेस के अन्य सांसदों की सदस्यता भी अवैध मानी जाएगी?
चतुर्वेदी ने कांग्रेस पर आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन, प्रेस सेंसरशिप और संविधान के अनुच्छेद 356 के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लोकतंत्र की रक्षा की बात करने से पहले अपने शासनकाल का हिसाब देना चाहिए। दोनों भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर देश में निराशा का माहौल बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भारत की शांति, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था सर्वोपरि हैं।



