Thursday, March 19, 2026
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LPG Gas Crisis in India : आत्मनिर्भर भारत और गैस की किल्लत

देश में LPG संकट लगातार बना हुआ है, जहां गैस की कमी, देरी और कालाबाजारी से आम लोग परेशान हैं। सरकार के दावे कमजोर पड़ रहे हैं और व्यवस्थाएं फेल नजर आ रही हैं। ईरान युद्ध से हालात और बिगड़े हैं, जिससे भारत की आत्मनिर्भरता पर सवाल उठे हैं। यह संकट बाहरी कारणों के साथ-साथ आंतरिक प्रबंधन की खामियों का भी नतीजा है।

संपादक: प्रतीक चौवे

एलपीजी का संकट खत्म नहीं हो पा रहा। कुछ दिन पहले तक जनता को बार-बार निश्चिंत रहने की सलाह देने वाली सरकार अब खुद कहने लगी है कि संकट तो है। एलपीजी से लदे दो जहाज भारत आ चुके हैं, इनके आने से गैस किल्लत पूरी तरह हल करने का दावा करने वाले मंत्री मुंह छिपाए फिर रहे हैं। आम आदमी गैस बुक नहीं होने से परेशान है तो किसी को आठ दिन बाद तक सिलेंडर ही नहीं मिल पाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी से इस मसले पर बुधवार को दो घंटे चर्चा भी करी। गैस सिलेंडर की जमाखोरी-काला बाजारी खूब हो रही है। केन्द्र हो या राज्य सरकारें, इंतजाम पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं। होटल- ढाबे तक बंद होने लगे हैं। गैस के इस संकट से महंगाई तेजी से बढ़ रही है। सरकार यह कहकर अपनी नाकामी छिपा रही है कि बुकिंग कम हो गई, खपत भी घट गई। अब इससे जनता की परेशानी कम हो गई, यह कैसे माना जा सकता है। उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। कई जगहों पर बुकिंग के बाद हफ्तों इंतजार करना पड़ रहा है। इससे साफ है कि संकट केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक प्रबंधन की खामियों का भी परिणाम है। चंद दिनों के ईरान युद्ध ने भारत के हाल खराब कर दिए, इससे यह भी जाहिर हो गया कि भारत कितना आत्मनिर्भर है।

उपभोक्ता को यह जानकारी क्यों नहीं मिल पाती कि उसका सिलेंडर कहां अटका है? अगर बैंकिंग और रेलवे जैसी सेवाएं रियल टाइम ट्रैकिंग दे सकती हैं, तो गैस आपूर्ति क्यों नहीं? उपभोक्ता को यह नहीं बताया जाता कि उसका सिलेंडर कब मिलेगा, कितनी देरी होगी और क्यों। डिजिटल युग में भी यदि एक साधारण उपभोक्ता अपने गैस सिलेंडर की स्थिति नहीं जान पाता, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। कई स्थानों पर यह शिकायत आम है कि सिलेंडर खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं, जबकि नियमित उपभोक्ता को समय पर आपूर्ति नहीं मिल रही। निगरानी की कमी और कार्रवाई में ढिलाई ने इस समस्या को और बढ़ावा दिया है। हर बार अंतरराष्ट्रीय संकट के समय देश को गैस की किल्लत का सामना करना पड़ता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भंडारण क्षमता, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया।

अगर देश की मौजूदा स्थिति पर नजर डालें, तो कई राज्यों में आपूर्ति अनियमित बनी हुई है। महानगरों में जहां कुछ हद तक स्थिति संभली हुई दिखती है, वहीं छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में हालात ज्यादा खराब हैं। कई जगहों पर उपभोक्ताओं को 10 से 15 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है, जो सामान्य समय से कहीं अधिक है। कई स्थानों पर कालाबाजारी और एजेंसियों की मनमानी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। निर्धारित मूल्य पर गैस न मिलना और अतिरिक्त पैसे की मांग इस संकट को और गंभीर बना रही है। यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि आमजन के साथ अन्याय भी है। इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर आम आदमी पर पड़ रहा है। रसोई गैस की कमी का मतलब है-जीवन की बुनियादी जरूरत पर संकट। खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन हो जाती है, जहां वैकल्पिक ईंधन का विकल्प भी सीमित होता है। अब जरूरत है कि सरकार इस संकट को केवल अस्थायी समस्या मानकर न टाले, बल्कि ठोस और स्थायी समाधान की दिशा में काम करे। वितरण प्रणाली को मजबूत करना, पारदर्शिता बढ़ाना और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना समय की मांग है। क्योंकि जब तक हर घर तक समय पर गैस नहीं पहुंचेगी, तब तक विकास और सुविधा के दावे अधूरे ही रहेंगे। आत्मनिर्भर भारत बनाने का सपना ऐसे में कैसे पूरा हो पाएगा‌? तेल-गैस ही नहीं कई छोटी-छोटी चीजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने के बाद ऐसा दावा कतई ठीक नहीं है। सरकार कोई भी हो, जनता की परेशानी का निस्तारण उसकी पहली प्राथमिकता है। सरकार इस पर ध्यान दे।

Prateek Chauvey
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माननीय प्रतीक चौबे जी(Prateek Chauvey ) द्वारा प्रस्तुत यह मंच जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा भरने का प्रयास है। यहाँ दी गई जानकारी आपकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक यात्रा में सहायक होगी, आपको नई सोच के साथ बदलाव और सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचने के लिए प्रेरित करेगी।
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