Sunday, July 12, 2026
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कोटा में 3 जिलों के जजों ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड से निपटने के कानूनी उपायों पर किया विचार-विमर्श

कोटा में आयोजित त्रैमासिक न्यायिक कार्यशाला में कोटा, बारां और झालावाड़ के न्यायाधीशों ने लैंगिक समानता, डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड पीड़ितों को त्वरित राहत और न्यायिक चुनौतियों पर मंथन किया।

कोटा। लैंगिक समानता, डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के पीड़ितों को कानूनी पेचीदगियों से निकालकर जल्द से जल्द राहत कैसे दिलाई जाए और न्यायिक प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों को कैसे दूर किया जाए, शनिवार को कोटा में 3 जिलों के जजों ने इसी मुख्य मकसद पर गंभीर मंथन किया. कोटा के जिला एवं सेशन न्यायाधीश सत्यनारायण व्यास के स्वागत भाषण के साथ शुरू हुई कार्यशाला में न्यायिक अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के नजीर बन चुके विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा की. अवसर था राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी, जोधपुर के निर्देश पर कृषि विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कोटा, बारां और झालावाड़ न्याय क्षेत्र की प्रथम त्रैमासिक कार्यशाला का.

चुनौतियों के समाधान और कानूनी निष्पादन पर विस्तृत मंथन

मुख्य अतिथि न्यायाधिपति पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने लैंगिक समानता सुनिश्चित करने में जजों की भूमिका पर विशेष बल दिया. उन्होंने कहा कि कार्यस्थलों पर महिलाओं की गरिमा के अधिकार को सुरक्षित रखने और उनके साथ होने वाले हर तरह के भेदभाव को पूर्णतः रोकने के लिए संवैधानिक प्रावधानों तथा सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने वर्तमान में बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट, फ्रॉड और अन्य साइबर अपराधों से जुड़े कानूनी प्रावधानों की न्यायिक प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान सुझाए.

त्रैमासिक वर्कशॉप के प्रभारी अधिकारी धर्मराज मीणा अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश कोटा ने बताया कि वर्कशॉप में कोटा, बारां और झालावाड़ के जिला न्यायाधीशों और न्यायिक मजिस्ट्रेटों ने डिजिटल गिरफ्तारी व साइबर अपराध से होने वाले नुकसान की वसूली सहित धन की डिक्री और उससे संबंधित कानूनी कार्यवाही के निष्पादन पर विस्तृत चर्चा की. इस दौरान उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के अहम ​बिंदुओं को भी बारीकी से जाना. डिजिटल अरेस्ट के बिंदु पर चर्चा में यह जानकारी दी गई कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ वास्तव में कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि साइबर अपराधियों द्वारा डरा-धमकाकर पैसे ऐंठने का एक फर्जीवाड़ा (Scam) है. यदि कोई व्यक्ति ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) का शिकार हो जाए, तो उसे तुरंत कॉल काट देनी चाहिए, किसी भी प्रकार की जानकारी या पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए तत्काल साइबर अपराध हेल्पलाइन या National Cyber Crime Reporting Portal पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए.

कौन-कौन रहा मौजूद ?

आयोजन में झालावाड़ के जिला एवं सेशन न्यायाधीश आलोक सुरोलिया, बारां के जिला एवं सेशन न्यायाधीश सत्यनारायण टेलर सहित न्यायिक मजिस्ट्रेट निनिषा अग्रवाल (झालावाड़), लता कुमारी भावसार (सांगोद), अभय बंसल व प्रियंका बाजपेई (बारां), कोटा के न्यायिक मजिस्ट्रेट रश्मि शर्मा, पूजा मीणा, पुष्पेंद्र सिंह, साक्षी जैन, दीपिका कचोलिया, पूर्वर्धन सिंह, मृदुल नागर, तनवी सिंघल और इटावा के न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक गुर्जर ने तीनों बिंदुओं पर अपने विचार रखें और वर्कशॉप के अंत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोटा नीरज मित्तल ने मुख्य अतिथि सहित वर्कशॉप में पधारे सभी न्यायिक अधिकारियों का धन्यवाद ज्ञापित किया.

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Premanshu Chaturvedi
Premanshu Chaturvedihttp://jagoindiajago.news
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