जयपुर। राजधानी जयपुर के खो नागोरियान इलाके में हाल ही में हुई पटाखा फैक्ट्री की भीषण आग के बाद अब अवैध निर्माणों को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे के बाद जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने पूरे इलाके का विस्तृत सर्वे कराया, जिसमें 700 से अधिक अवैध निर्माण और अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि इन निर्माणों की एक सूची भी तैयार की गई है, हालांकि इसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसी को लेकर शहर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
हादसे के बाद शुरू हुआ बड़ा सर्वे
खो नागोरियान स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट के बाद JDA ने पूरे क्षेत्र का सर्वे कराया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सर्वे में 700 से ज्यादा अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों की पहचान की गई है। सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि इन पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है, लेकिन फिलहाल किसी भी सूची को आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है।
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जब इस संबंध में JDA अधिकारियों से जानकारी मांगी गई तो प्रवर्तन शाखा के डीआईजी आनंद शर्मा ने कहा कि सर्वे रिपोर्ट अभी संकलित की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
‘सीक्रेट लिस्ट’ को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार खो नागोरियान की कई कॉलोनियां वर्षों पहले बिना स्वीकृति के विकसित हुई थीं। बाद में अलग-अलग सरकारी योजनाओं और शिविरों के दौरान कई स्थानों पर पट्टे भी जारी किए गए। ऐसे में पूरा मामला कानूनी और प्रशासनिक रूप से जटिल माना जा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि यदि चिह्नित निर्माणों की पूरी सूची सार्वजनिक कर दी जाती है तो स्थानीय विरोध और राजनीतिक विवाद खड़े हो सकते हैं। हालांकि JDA ने आधिकारिक तौर पर किसी भी प्रकार की “सीक्रेट लिस्ट” होने की पुष्टि नहीं की है।
18 बीघा तालाब की जमीन पर बसी कॉलोनी?
इस पूरे मामले का सबसे चर्चित पहलू करीम नगर कॉलोनी को लेकर सामने आया है, जहां पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह क्षेत्र कभी करीब 18 बीघा के तालाब का हिस्सा था। आरोप है कि समय के साथ तालाब में मिट्टी, मलबा और कचरा डालकर उसे समतल किया गया और बाद में वहां मकान, गोदाम तथा फैक्ट्रियां बना दी गईं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाके में पटाखों और ज्वलनशील केमिकल से जुड़े कारोबार को लेकर लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं। क्षेत्रीय विधायक कैलाश वर्मा ने भी विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था। आरोप है कि प्रभावी कार्रवाई बड़े हादसे के बाद ही शुरू हुई।
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अब आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में 700 से अधिक चिह्नित निर्माणों पर कार्रवाई होगी? क्या अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर अभियान चलेगा या मामला केवल सर्वे रिपोर्ट तक सीमित रह जाएगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में JDA के अंतिम निर्णय के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल JDA का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा रही है और सभी तथ्यों के परीक्षण के बाद ही आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
नोट: 700 से अधिक अवैध निर्माण, संभावित कार्रवाई और कथित “सीक्रेट लिस्ट” से जुड़ी जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों पर आधारित है। JDA ने आधिकारिक रूप से किसी “सीक्रेट लिस्ट” की पुष्टि नहीं की है। अंतिम कार्रवाई संबंधित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही की जाएगी।



